बच्चों में आत्महत्या की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था जरूरी : केरल की मंत्री

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बच्चों में आत्महत्या की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था जरूरी : केरल की मंत्री

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 05:10 PM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 05:10 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 10 सितंबर (भाषा) केरलम की मंत्री बिंदु कृष्णा ने बृहस्पतिवार को कहा कि बच्चों और किशोरों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी आधारित तरीका अपनाने की जरूरत है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने तिरुवनंतपुरम में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य तथा मनोवैज्ञानिक कल्याण पर एक महीने तक चलने वाले राज्य-स्तरीय अभियान का उद्घाटन करते हुए कहा कि बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित हस्तक्षेप करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

यह अभियान विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग तथा राज्य बाल संरक्षण सोसायटी द्वारा आयोजित किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य ‘आइए बातचीत शुरू करें, बात करें, सुनें और समर्थन करें’ संदेश को बढ़ावा देना है।

मंत्री ने कहा कि बच्चों की समस्याओं को समझने और उन्हें निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक कार्यक्रम आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि इस एक महीने के अभियान को सरकार की एक व्यापक पांच वर्षीय प्रमुख परियोजना के रूप में विकसित किया जाएगा।

बिंदु ने बच्चों को उनके साथियों से तुलना करने के कारण उनपर अत्यधिक शैक्षणिक दबाव पड़ता है। उन्होंने इसे बच्चों में मानसिक परेशानी का एक प्रमुख स्रोत बताया है।

उन्होंने घर पर ऐसा माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया जहां परिवार के सदस्य बातचीत करने और एक-दूसरे की बात सुनने के लिए तैयार हों, खासकर बदलते सामाजिक माहौल में जिसमें यह देखा गया है कि परिवारों के बीच बातचीत कम होती है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यह अभियान महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘आवर रिस्पॉसिबिलिटी टू चिल्ड्रेन’ (बच्चों के प्रति हमारी जिम्मेदारी) परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है।

अभियान के हिस्से के रूप में शिक्षकों, मनोसामाजिक परामर्शदाताओं, देखभालकर्ताओं और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

एक ‘अभिभावक भागीदारी सप्ताह’ के दौरान सकारात्मक पालन-पोषण, बच्चों के साथ संवाद, ‘डिजिटल पेरेंटिंग’, शैक्षणिक तनाव और किशोरावस्था के दौरान व्यवहार में बदलाव पर चर्चा की जाएगी।

भाषा प्रचेता रंजन

रंजन