यादवपुर विश्वविद्यालय ने निधि के इस्तेमाल और योजना को लेकर पीएम-उषा समिति बनायी

यादवपुर विश्वविद्यालय ने निधि के इस्तेमाल और योजना को लेकर पीएम-उषा समिति बनायी

यादवपुर विश्वविद्यालय ने निधि के इस्तेमाल और योजना को लेकर पीएम-उषा समिति बनायी
Modified Date: September 19, 2026 / 08:16 pm IST
Published Date: September 19, 2026 8:16 pm IST

कोलकाता, 19 सितंबर (भाषा) यादवपुर विश्वविद्यालय ने केंद्र की ‘पीएम-उषा’ योजना के तहत मिलने वाली निधियों के सही इस्तेमाल और योजना की निगरानी के लिए 24 सदस्यीय समिति का गठन किया है। विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि कार्यवाहक रजिस्ट्रार देबजीत दत्ता की अध्यक्षता वाली समिति इस बात की योजना तैयार करेगी कि इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद का इस्तेमाल कैसे और कहां किया जाएगा।

इसके बाद इन प्रस्तावों को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) के सामने रखा जाएगा।

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) केंद्र सरकार की राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान का नया रूप है, जिसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों को आर्थिक मदद दी जाती है।

पश्चिम बंगाल की पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने केंद्र प्रायोजित शिक्षा योजनाओं में ‘पीएम’ (प्रधानमंत्री) शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। तब पश्चिम बंगाल ने इस योजना के लिए सहमति नहीं दी थी, जिसके कारण विश्वविद्यालयों को इससे जुड़ी आर्थिक मदद नहीं मिल पाई थी।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राज्य प्रशासन ने ‘पीएम-उषा’ के लिए सहमति दे दी।

कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने शनिवार को बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने समिति के लिए सदस्यों को नामित किया है, जबकि हाल में राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री ने कार्यकारी परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए एक प्रतिनिधि को नामित किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालय के लिए 250 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा के बाद एक ‘उत्कृष्ट संस्थान समिति’ बनाई गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार से 250 करोड़ रुपये की हालिया मंजूरी से संस्थान में बुनियादी ढांचे के विकास और शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भाषा

राजकुमार

राजकुमार दिलीप

दिलीप


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