नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को दिल्ली में अपनी ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग के साथ वार्ता की, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के मामले में कई ‘‘सकारात्मक घटनाक्रम’’ हुए हैं।
राष्ट्रीय राजधानी में ‘क्वाड’ विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद, जयशंकर और वोंग ने शाम को 17वें भारत-ऑस्ट्रेलिया विदेश मंत्रियों के संवाद के हिस्से के रूप में द्विपक्षीय वार्ता की।
जयशंकर की अध्यक्षता में हुई समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने भाग लिया।
भारत-ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की वार्ता के दौरान अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, ‘‘क्वाड बैठक में आज सुबह का सत्र बहुत अच्छा रहा। आज शाम मैं शेष मुद्दों, हमारे पड़ोस, आपके पड़ोस, शेष विश्व और निश्चित रूप से त्रिपक्षीय समझौतों पर चर्चा करना चाहूंगा, जिनमें हम दोनों शामिल हैं।’’
उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया और कहा कि यह अवसर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों को इस साझेदारी की समीक्षा करने का मौका देता है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया विदेश मंत्रियों का 16वां संवाद नवंबर 2025 में नयी दिल्ली में आयोजित किया गया था।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘पिछली बैठक एक साल पहले हुई थी। हमने वास्तव में कई सकारात्मक घटनाक्रम देखे हैं, हमारे प्रधानमंत्रियों की नवंबर में मुलाकात हुई थी। हमें जनवरी में आपकी संसद के अध्यक्ष की यहां मेजबानी करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।’’
वोंग ने मंगलवार को ‘क्वाड’ बैठक में भाग लेने के बाद एक पोस्ट में कहा, ‘‘क्वाड देशों के विदेश मंत्री हमारे लोगों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए सार्थक परिणाम देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मैं आज दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों के सम्मेलन की मेजबानी के लिए डॉ. एस जयशंकर और भारत को धन्यवाद देती हूं, क्योंकि हम एक शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध क्षेत्र बनाने के लिए काम कर रहे हैं।’’
एक अलग पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘‘जैसा कि विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है, क्वाड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को अपनी सुरक्षा, अपने विकास और अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने की स्वतंत्रता हो।’’
भाषा सुभाष दिलीप
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