नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस की नेता एवं सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें नफरत फैलाने वाले भाषण के एक मामले में उन्हें 15 अगस्त को पुलिस के समक्ष पेश होने का निर्देश देने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।
मोइत्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कानून के तहत उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये पुलिस के समक्ष पेश होने का कानूनी अधिकार है।
उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस के नोटिस के मुताबिक, मुझे अपने निर्वाचन क्षेत्र के थाने में पेश होना है। पिछली बार जब मैं वहां गई थी तो दो बातें हुई थीं। पहले मुझे धमकियां मिलीं कि (मुझ पर) अंडे फेंके जाएंगे आदि और दूसरी बार, वास्तव में अंडे फेंके गए।’’
पीठ ने मोइत्रा को पुलिस के समक्ष पेश होने को कहा और मौखिक टिप्पणी की, ‘‘आप सांसद हैं। राजनीति में आने के बाद आपको अंडों से डर लगता है?’’
पीठ ने कहा, ‘‘हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाईं… ऐसी याचिकाएं इस अदालत के समक्ष आनी ही नहीं चाहिए।’’
पीठ के मामले पर सुनवाई के लिए इच्छुक नहीं होने पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने याचिका वापस ले ली, और न्यायालय ने इसे वापस ले लिया गया मानते हुए खारिज कर दिया गया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नफरत फैलाने वाले भाषण के एक मामले में मोइत्रा को पांच अक्टूबर तक हर प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से 21 जुलाई को अंतरिम राहत दी थी। मोइत्रा का दावा है कि यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है।
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