‘जेन-जी’ से संवाद की भागवत की पहल का दिलीप घोष ने किया समर्थन

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‘जेन-जी’ से संवाद की भागवत की पहल का दिलीप घोष ने किया समर्थन

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  • Publish Date - August 7, 2026 / 01:48 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 01:48 PM IST

कोलकाता, सात अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ के साथ संवाद की पहल का समर्थन करते हुए कहा कि वह हमेशा हिंदू समाज के ‘‘संरक्षक, मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’’ की भूमिका निभाते रहे हैं।

घोष ने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया और राष्ट्रविरोधी प्रभावों से गुमराह होने से बचाने के लिए ‘‘परामर्श और मार्गदर्शन’’ की आवश्यकता है। उन्होंने मुंबई में बृहस्पतिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत द्वारा की गई टिप्पणी का समर्थन करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत एक तरह से हिंदू समाज के संरक्षक, मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक हैं। जब भी समाज किसी समस्या का सामना करता है या युवा पीढ़ी गलत दिशा में जाती दिखाई देती है, तब उनका दायित्व है कि वे उसे देखें, उसकी बात सुनें और मार्गदर्शन दें। वह हमेशा यही करते आए हैं।’’

भागवत की इस पहल को ‘‘सकारात्मक कदम’’ बताते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है और मुझे विश्वास है कि इसका कोई समाधान अवश्य निकलेगा।’’

घोष ने कहा कि युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और ‘‘विदेशी एजेंटों’’ सहित कई माध्यमों से प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे कई माध्यम हैं, जिनके जरिए युवा पीढ़ी को गुमराह किया जा सकता है, जिनमें सोशल मीडिया और विदेशी एजेंट भी शामिल हैं। कई बार वे अनजाने में और बिना समझे ही देश के खिलाफ रुख अपना लेते हैं। इसलिए उन्हें उचित परामर्श और सही मार्गदर्शन दिए जाने की आवश्यकता है।’’

भागवत ने बृहस्पतिवार को मुंबई में ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स’ (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में ‘जेन-जी’ और ‘जेन अल्फा’ के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा था कि विरोध प्रदर्शन भी बातचीत का एक तरीका है और लोकतंत्र में, विरोध प्रदर्शन आम सहमति बनाने का एक जरिया है। अलग-अलग विचार एक साथ आते हैं और चर्चा के बाद आम सहमति बनती है।

भाषा

गोला रंजन

रंजन