जमीयत ने असम के मुख्यमंत्री की ‘सांप्रदायिक’ टिप्पणियों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया

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जमीयत ने असम के मुख्यमंत्री की ‘सांप्रदायिक’ टिप्पणियों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया

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  • Publish Date - February 2, 2026 / 08:52 PM IST,
    Updated On - February 2, 2026 / 08:52 PM IST

नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एमएम) ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की हालिया टिप्पणियों को सांप्रदायिक, बेहद विभाजनकारी और संविधान की भावना के विरुद्ध बताते हुए उनके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।

संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने वरिष्ठ अधिवक्ता एम. आर. शमशाद के माध्यम से दायर याचिका में अदालत से संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए कड़े और प्रवर्तन योग्य दिशा-निर्देश तैयार करने का अनुरोध किया ताकि नफरत फैलाने या किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग न हो।

याचिका में असम के मुख्यमंत्री के 27 जनवरी के भाषण का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि विशेष रूप से उच्च संवैधानिक पद पर आसीन किसी व्यक्ति की तरफ से दिए गए इस तरह के बयानों को राजनीतिक बयानबाजी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

संगठन ने कहा, “इसके बजाय, ऐसी टिप्पणियां नफरत फैलाने, शत्रुता पैदा करने और एक समुदाय को बदनाम करने के लिए जानबूझकर किए गए प्रयास के समान हैं।”

इस याचिका में शीर्ष अदालत से यह अनुरोध भी किया गया कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए नियामक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि कोई भी अपने पद का फायदा उठाकर सांप्रदायिक घृणा फैलाने, जनता के बीच वैमनस्य उत्पन्न करने या किसी समूह को बदनाम करने का प्रयास न कर सके।

भाषा जोहेब नेत्रपाल

नेत्रपाल