जम्मू-कश्मीर : पुंछ के लोगों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की बमबारी के मंजर को याद किया

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जम्मू-कश्मीर : पुंछ के लोगों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की बमबारी के मंजर को याद किया

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 06:26 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 06:26 PM IST

पुंछ, सात मई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के पुंछ में कई परिवार एक साल पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सैन्य तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान द्वारा की गई बमबारी के भयावह दिनों को याद करके आज भी सिहर उठते हैं।

हालांकि उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि इस अभियान ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एवं शांति की भावना पैदा की है और पिछले एक साल में सीमा पार से बमबारी की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है।

उस समय सीमा पार से हुई बमबारी के चलते पुंछ कस्बे और सीमावर्ती इलाकों में घरों को नुकसान पहुंचा था और इसके निशान आज भी देखे जा सकते हैं। इन हमलों में पुंछ जिले में लगभग 13 नागरिकों की मौत हो गई थी।

पूंछ कस्बे में गिरे एक तोप के गोले की चपेट में आने से अपने भतीजे अमरजीत सिंह को खोने वाले सुरजन सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा सीमा पार आतंकी ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद सीमा पर स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

सिंह ने कहा, ‘‘पिछले एक साल में ऐसी कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान भयभीत हो गया और पुंछ और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में आतंकवादी गतिविधियां काफी कम हो गईं।’’

उन दिनों को याद करते हुए सिंह ने बताया कि पिछले साल सात मई की सुबह इलाके में सीमा पार से भीषण बमबारी हुई थी।

भावुक हुए सिंह ने कहा, ‘‘सुबह करीब 7:30 बजे हमारे घर के पास एक धमाका हुआ। अमरजीत को छर्रे लगे। उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दो घंटे बाद उसकी मौत हो गई। वह मेरे लिए बेटे जैसा था।’’

अपने दो युवा चचेरे भाई-बहनों – ज़ैन और ज़ोया को खोने वाले सरफराज मीर ने कहा कि बमबारी का मंजर याद करके आज भी प्रभावित परिवार सिहर उठते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सीमा पार से लगातार बमबारी के कारण हमने पुंछ में बचपन से ही घाव देखे हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद से शांति है।’’

मीर ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोग हमेशा से देश के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने देश के साथ खड़े हैं। अगर फिर कभी कुछ होता है, तो सभी नागरिक सेना, प्रशासन और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ एकजुट होकर खड़े होंगे।’’

अपने परिवार को हुए नुकसान का वर्णन करते हुए मीर ने कहा कि मृत बच्चों के माता-पिता अब भी शोक में जी रहे हैं।

भाषा शफीक नरेश

नरेश