जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया

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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया

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  • Publish Date - April 12, 2026 / 06:48 PM IST,
    Updated On - April 12, 2026 / 06:48 PM IST

(सुमीर कौल)

श्रीनगर/नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) लश्कर-ए-तैयबा आतंकी समूह के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर कार्रवाई तेज करते हुए, जम्मू कश्मीर पुलिस ने केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में हरियाणा और राजस्थान से कई लोगों को हिरासत में लिया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने आतंकियों को पासपोर्ट समेत फर्जी पहचान पत्र हासिल करने में मदद की थी।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि हिरासत में लिए गए व्यक्तियों ने आधार कार्ड, स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड और मतदाता कार्ड जैसे दस्तावेज बनाकर आतंकवादियों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की।

इस जांच का नेतृत्व श्रीनगर पुलिस ने किया, जिसने पूरी खुफिया जानकारी जुटाई। हालांकि, जैसे-जैसे इस अभियान का दायरा और इसके व्यापक सुरक्षा प्रभाव स्पष्ट होते गए, मामले में केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस को शामिल किया गया, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में फैले इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

आधिकारियों के अनुसार, आतंकियों में से एक, जिसकी पहचान उमर उर्फ ‘खरगोश’ के रूप में हुई है, ने पासपोर्ट हासिल कर लिया था और इसके बाद वह इंडोनेशिया फरार हो गया। माना जा रहा कि वहां से उसने एक और फर्जी यात्रा दस्तावेज का इस्तेमाल किया और फिलहाल वह किसी खाड़ी देश में छिपा हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के कराची निवासी उमर ने 2012 के बाद भारत में घुसपैठ की थी और राजस्थान के जयपुर से प्राप्त जाली पासपोर्ट का इस्तेमाल करके 2024 में भाग गया था।

ये विवरण तब सामने आए जब श्रीनगर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के एक “गहरे रूप से जड़ जमाए” अंतर-राज्यीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें एक पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा भी शामिल है, जो पिछले 16 वर्षों से फरार था और जिसने केंद्र शासित प्रदेश के बाहर अपने ठिकाने सफलतापूर्वक स्थापित कर लिए थे।

अब्दुल्ला के साथ एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक उस्मान उर्फ खुबैब की गिरफ्तारी को श्रीनगर पुलिस की एक और बड़ी सफलता माना जा रहा है। छह महीने पहले पुलिस ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय केंद्रित एक “सफेदपोश” आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जिसका संबंध नवंबर 2025 के लाल किला विस्फोट मामला से बताया गया था।

पूछताछ के दौरान अब्दुल्ला ने जांचकर्ताओं को अपने और उमर के भारत भर में फैले नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उसने विशेष रूप से राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में उनकी मौजूदगी के बारे में बताया।

अधिकारियों ने बताया कि 31 मार्च को शुरू हुए इस अभियान ने लश्कर-ए-तैयबा के वित्तपोषण और वित्तीय ढांचे का खुलासा किया है। पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने इसकी निगरानी की। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों ने न केवल जम्मू कश्मीर में, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी नेटवर्क बनाने के लिए जाली दस्तावेजों और पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया।

अधिकारियों ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है, खासकर उन लोगों को जिन्होंने फर्जी तरीके से पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ हासिल करने में मदद की थी।

गिरफ्तार किए गए पांच लोगों में श्रीनगर के तीन निवासी मोहम्मद नकीब भट, आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ ​​मामा शामिल हैं। इन पर आतंकवादियों को पनाह देने, भोजन और रसद सहायता प्रदान करने का आरोप है।

इस नेटवर्क के खुलासे की शुरुआत 31 मार्च को हुई, जब श्रीनगर के तीन निवासियों में से पहले व्यक्ति, नकीब भट को पांडाच से एक पिस्तौल और अन्य आपत्तिजनक सामग्री के साथ गिरफ्तार किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान भट ने पुलिस को बताया कि वह लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य था और उसने अपने एक अन्य साथी, जकोरा निवासी आदिल राशिद से हथियार और गोला-बारूद प्राप्त किए थे और विदेशी आतंकवादियों को भी सहायता प्रदान की थी।

भट से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस मीर और राशिद भट तक पहुंची, जो श्रीनगर में लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय सहयोगी बताए जा रहे हैं। जांच के दौरान, गिरफ्तार आरोपियों के खुलासों के बाद श्रीनगर और उसके आसपास के वन क्षेत्रों में स्थित कई ठिकानों का भी भंडाफोड़ किया गया।

इस अंतर-राज्यीय लश्कर-ए-तैयबा मॉड्यूल के भंडाफोड़ के करीब छह महीने पहले नवंबर 2025 में श्रीनगर पुलिस ने ‘अल फलाह मॉड्यूल’ के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस समय की जांच में उच्च शिक्षित पेशेवरों, जिनमें अधिकतर डॉक्टर थे, के एक नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था, जिन्हें आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कट्टरपंथी बनाया गया था।

आरोपियों में से एक अल फलाह विश्वविद्यालय का डॉ. उमर-उन नबी भी था जिसने पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी एक कार में विस्फोट किया था। इस घटना में 12 से अधिक लोग मारे गए थे।

भाषा आशीष रंजन

रंजन