जम्मू आतंकवादी हमला मामले में तीन आरोपियों की संयुक्त जमानत याचिका खारिज

जम्मू आतंकवादी हमला मामले में तीन आरोपियों की संयुक्त जमानत याचिका खारिज

जम्मू आतंकवादी हमला मामले में तीन आरोपियों की संयुक्त जमानत याचिका खारिज
Modified Date: September 19, 2026 / 08:14 pm IST
Published Date: September 19, 2026 8:14 pm IST

जम्मू, 19 सितंबर (भाषा) अप्रैल 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सांबा दौरे से पहले जम्मू में हुए आतंकवादी हमले के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों की संयुक्त जमानत याचिका विशेष अदालत ने खारिज कर दी।

उल्लेखनीय है कि 21 और 22 अप्रैल 2022 की मध्यरात्रि को जम्मू के बाहरी इलाके सुंजवां में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के वाहन पर हुए हमले में एक सहायक उप-निरीक्षक (एसएसआई) शहीद हो गया था और कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे।

प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो हमलावरों को बाद में जवाबी कार्रवाई में मार गिराया गया था और उनके पास से भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किया गया था। दोनों पाकिस्तानी नागरिक थे।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) इस मामले की जांच कर रहा है।

एनआईए अदालत के विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने दक्षिण कश्मीर के रहने वाले गिरफ्तार आरोपियों शफीक अहमद शेख, बिलाल अहमद वागे और मोहम्मद इशहाक चोपन की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए 17 सितंबर को कहा कि यह मानने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हैं।

आरोपियों ने मुकदमे में देरी और अपनी लंबी कैद का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी।

अदालत ने कहा कि मुकदमे में देरी कोई अच्छा आधार नहीं है, खासकर आतंकवाद से जुड़े मामलों में।

अदालत ने अपने 27 पृष्ठ के आदेश में कहा, “फिलहाल मुकदमे में देरी के लिए अभियोजन पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके अलावा, सर्वोच्च अदालत और विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा बार-बार यह कहा गया है कि निचली अदालत की ओर से जमानत देने के लिए मुकदमे में देरी को अच्छा आधार नहीं माना जा सकता।” भाषा जोहेब माधव

माधव


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