प. एशिया से लौटे एलपीजी पोत के चालक दल में जमशेदपुर का व्यक्ति शामिल, परिवार ने राहत की सांस ली

प. एशिया से लौटे एलपीजी पोत के चालक दल में जमशेदपुर का व्यक्ति शामिल, परिवार ने राहत की सांस ली

प. एशिया से लौटे एलपीजी पोत के चालक दल में जमशेदपुर का व्यक्ति शामिल, परिवार ने राहत की सांस ली
Modified Date: March 17, 2026 / 11:09 am IST
Published Date: March 17, 2026 11:09 am IST

(फाइल फोटो के साथ)

(बी. श्रीनिवास)

जमशेदपुर, 17 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बाद गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचे भारतीय ध्वज वाले एलपीजी पोत ‘शिवालिक’ के चालक दल में झारखंड के जमशेदपुर के अंश त्रिपाठी भी शामिल थे, जिनके लौटने पर परिवार ने राहत की सांस ली।

अंश त्रिपाठी के पिता मिथिलेश त्रिपाठी ने कहा कि अंश उनका इकलौता बेटा है जो पोत पर सेकंड इंजीनियर के रूप में काम करता है। उस पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे से यात्रा के दौरान जहाज के तकनीकी संचालन की निगरानी करने की जिम्मेदारी थी।

मिथिलेश त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे से आखिरी बार लगभग चार से पांच दिन पहले व्हाट्सऐप कॉल पर बात की थी। उस वक्त पोत कतर से रवाना हो रहा था।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘उन्हें मुख्यालय से हरी झंडी मिलने तक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। भारत सरकार सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रही थी।’’

भारतीय वायु सेना के पूर्व फ्लाइट इंजीनियर मिथिलेश त्रिपाठी ने बाद में जमशेदपुर के पास जादुगोड़ा स्थित यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में काम किया। वर्तमान में वह जमशेदपुर के परडीह के पास एक आवासीय सोसाइटी में रहते हैं।

अपने बेटे के बारे में बात करते हुए त्रिपाठी ने बताया कि अंश ने जमशेदपुर और जादुगोड़ा में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर बीआईटी (बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की तथा बाद में कोच्चि से मरीन इंजीनियर के रूप में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने लगभग 2014-15 में शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में काम करना शुरू किया।

त्रिपाठी ने बताया, ‘‘कतर से निकलने से पहले अंश ने मुझे बताया कि वे हिंद महासागर की ओर जा रहे हैं। उसने बस इतना ही कहा।’’

उन्होंने बताया कि अंश ने उनसे पोत पर सवार चालक दल के सदस्यों की संख्या के बारे में कोई चर्चा नहीं की।

त्रिपाठी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की खबर सुनकर परिवार चिंतित था।

उन्होंने पोत के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचने की खबर सुनकर राहत व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘क्षेत्र में युद्ध छिड़ने के बाद से हम अंश और चालक दल के सदस्यों को लेकर बेहद चिंतित थे। हम लगातार टीवी पर समाचार देखते रहते थे।’’

भारत और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक और नंदा देवी 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर शनिवार तड़के होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए।

अधिकारियों ने बताया कि शिवालिक सोमवार को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा मंगायी 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी को लेकर मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा।

उन्होंने बताया कि नंदा देवी जहाज मंगलवार को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचने वाला है।

भाषा सुरभि गोला

गोला


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