नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) मामूली प्रक्रियात्मक और तकनीकी त्रुटियों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने वाले ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026’ को कांग्रेस ने भ्रष्टाचार बढ़ाने वाला बताया, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि यह विधेयक संदेह से विश्वास की ओर ले जाने वाला और उद्यमियों को मुक्त माहौल प्रदान करने वाला है।
लोकसभा में बुधवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026’ चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया।
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सदस्य सी किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि यह विधेयक जन विश्वास नहीं लाता, बल्कि विश्वास तोड़ता है। उन्होंने कहा कि यह सुधार के नाम पर त्रुटियों का पुलिंदा है।
उन्होंने कहा कि रेलवे की संपत्ति पर अतिक्रमण और रेलगाड़ियों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को कमजोर करके नए कानून में कारावास की सजा की जगह जुर्माने का प्रावधान एक मजाक की तरह है।
रेड्डी ने कहा कि विधेयक की एक धारा में आपदा राहत अभियान में बाधा डालने पर सजा को घटाया गया है और यह नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने के समान है।
उन्होंने कहा कि यह सुधार नहीं, बल्कि प्रशासनिक आत्मसमर्पण है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह विधेयक ‘‘हमें व्यवस्थित तरीके से कानून के डर को समाप्त करने के लिए कह रहा है और इसमें हर धोखेबाज को कहा जा रहा है कि यदि तुम्हारे पास पैसा है तो डरने की जरूरत नहीं है।’’
भाजपा के तेजस्वी सूर्या ने कहा कि यह विधेयक आजाद भारत में अनेक मामूली गलतियों वाले प्रावधानों को अपराधमुक्त करने की सबसे बड़ी कवायद है जिसमें 1000 से अधिक छोटे जुर्मों को अपराध की श्रेणी से हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक ‘‘अविश्वास से विश्वास, संदेह से विश्वास की ओर ले जाता है जो विकसित भारत की आधारशिला है।’’
इस विधेयक का अध्ययन करने वाली प्रवर समिति के अध्यक्ष रहे सूर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस विधेयक के संबंध में मार्गदर्शन देते हुए उनसे कहा कि भारत अब सिर्फ चलेगा नहीं भारत दौड़ेगा और ये सारे पुराने कानून जिन्होंने भारत के उद्यमियों की भावनाओं को कमजोर किया है, उन्हें खोजकर निकाला जाए और एक बार में अपराध की श्रेणी से हटा दिया जाए, ताकि जीवनशैली और व्यापार की सुगमता बढ़े।
उन्होंने कहा कि भले ही आज कांग्रेस इस विधेयक का विरोध कर रही है, लेकिन प्रवर समिति में हर सिफारिश सर्वसम्मति से पारित की गई।
सूर्या ने उदाहरण देते हुए कहा कि 155 साल पुराने ब्रिटिशकालीन कानून में किसी किसान की गाय उसकी जानकारी के बिना दूसरे की संपत्ति में चले जाने पर कारावास का प्रावधान था, इसी तरह असम और बंगाल में चाय बागान के कर्मचारियों द्वारा खातों में एंट्री में गलती पर तीन महीने की सजा का प्रावधान था।
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रावधानों को जन विश्वास कानून के माध्यम से समाप्त किया जा रहा है।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर अंग्रेजों की मानसिकता से काम करने और 70 साल के उसके शासन में छोटे किसान से लेकर छोटे दुकानदार तक, छोटे उद्यमी से लेकर बड़े व्यापारी तक सभी में आपराधिक मुकदमों का डर पैदा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि आज विश्वास आधारित प्रणाली बनाई जा रही है।
सूर्या ने कहा कि इसी तरह नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) में लागू दो तरह की संपत्ति कर प्रणाली को पिछले 30 साल से बदलने की मांग की जा रही थी और अब राजधानी में ‘एक शहर, एक कर’ प्रणाली लागू हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के समय जहां चेतावनी, जुर्माने का इस्तेमाल कर सकते थे, वहां कारावास का प्रावधान करके डर का माहौल बनाया गया।
भाजपा सांसद ने कहा कि यह कांग्रेस को मिली औपनिवेशिक विरासत की वजह से हुआ जो पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक लाइसेंस कोटा परमिट राज के मजबूत होने के साथ बढ़ता रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू के समक्ष जब देश के एक बड़े उद्योगपति ने व्यापार जगत को लाभ (प्रोफिट) नहीं मिलने की व्यथा व्यक्त की थी तो नेहरू ने उनसे कहा था कि ‘प्रोफिट’ शब्द मत बोलिए, यह एक ‘डर्टी’ (गंदा) शब्द है।
सूर्या ने आरोप लगाया कि आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी उसी तरह देश के उद्योगपतियों पर निशाना साध रहे हैं, तब से अब तक कांग्रेस की सोच में कुछ नहीं बदला।
भाजपा सदस्य ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी लाइसेंस कोटा परमिट राज को अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला बताया था जो कांग्रेस की ही 70 साल की नीतियों पर उनकी कठोर टिप्पणी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इसी संस्कृति की वजह से भ्रष्टाचार शुरू हुआ।
भाजपा सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार में आने के बाद कहा था कि उनके शासन में उद्योगपतियों को सम्मान मिलेगा और वे देश के विकास में भागीदार रहेंगे।
सूर्या ने कहा कि पिछले दस साल में जीएसटी, आईबीसी और चार श्रम संहिताएं जैसे अनेक कदम उठाए गए हैं जिन कारणों से भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थयवस्था बना है और इनका सकारात्मक प्रभाव 20 साल तक देखने को मिलेगा।
वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) के हरेंद्र सिंह मलिक ने इस प्रस्तावित कानून को अपराधमुक्ति के नाम पर कानून को कमजोर करने वाला बताया।
उन्होंने दावा किया कि एमएसएमई के सुधार को इस कानून से बाहर रखा गया है जो सबसे अधिक जरूरी। मलिक ने आरोप लगाया कि सरकार की नीति मजदूरों का शोषण करने वाली और कॉर्पोरेट को संरक्षण देने वाली है, जो इस विधेयक में साफ दिखाई देता है।
उन्होंने कई प्रावधानों में कारावास की सजा को हटाकर जुर्माने का प्रावधान लाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘यह कानून का भय खत्म करके पैसे में लोगों का सम्मान खरीदने का प्रयास है। बड़े कॉर्पोरेटट घरानों पर छोटे-छोटे जुर्मानों से क्या असर पड़ेगा।’’
तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के भरत मुतुकुमिल्ली ने विपक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ प्रावधानों को अपराध से मुक्त करने का मतलब यह नहीं है कि लोगों को छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया बदली है, सजा से छूट नहीं दी जा रही।
जनता दल (यूनाइटेड) के देवेश चंद्र ठाकुर (जदयू) ने कहा कि न्यायिक सुधार भी इस विधेयक का बड़ा पहलू है क्योंकि हजारों लंबित मामलों का समाधान निकलने से अदालतों का समय बचेगा।
भाषा वैभव माधव
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