नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने शुक्रवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शनकारियों को ‘जेन-जी’ के प्रतिनिधि के तौर पर पेश किए जाने को खारिज कर दिया। विहिप ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वाले और अशोभनीय व्यवहार में शामिल लोग देश की युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते।
‘चलो संसद’ मार्च के दौरान 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस छोड़ी थी।
छात्रों के नेतृत्व में हुए ये प्रदर्शन कई शहरों तक फैल गए थे और इनकी मुख्य मांग तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी।
जंतर-मंतर से 20 जून को शुरू हुआ यह आंदोलन 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा कॉजपा की अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद समाप्त हुआ।
‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में विहिप के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि हालिया प्रदर्शनों के आधार पर भारत के युवाओं को परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश की युवा पीढ़ी अब भी धर्म, देश की सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्र सेवा से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘वे असली जेन-जी नहीं हैं। वे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते।’’
जैन ने कहा, ‘‘ऐसे विकृत मानसिकता वाले कितने लोग हैं, जो सड़क पर भारत माता की तस्वीर के साथ अशोभनीय इशारे करते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां के खिलाफ अपशब्द बोलते हैं या वहां मौजूद जवानों पर हमला करते हैं? हमारा मानना है कि ऐसे लोगों के साथ भी संवाद बनाए रखना चाहिए, लेकिन वे असली जेन-जी नहीं हैं। वे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते।’’
जैन ने कहा कि उन्होंने कॉलेजों में पढ़ाया है और युवाओं के बीच समय बिताया है, लेकिन प्रदर्शनों में दिखे इस तरह के व्यवहार का सामना कभी नहीं किया।
जैन ने कहा, ‘‘जेन-जी एक आयु वर्ग है और यह आयु वर्ग धर्म से जुड़ा हुआ है। यह तब दिखाई देता है जब भारत के युवा नए साल की पूर्व संध्या पर पिकनिक स्थलों पर जाने के बजाय मथुरा, वृंदावन, काशी, अयोध्या और वैष्णो देवी जाते हैं और खुद को धन्य महसूस करते हैं।”
उन्होंने कहा कि आम तौर पर जेन-जी के रूप में पहचाना जाने वाला आयु वर्ग उन लोगों से कहीं बड़ा है, जिन्होंने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। उन्होंने सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती को इसका उदाहरण बताया।
जैन ने कहा, ‘‘सेना में शामिल होने वाले लोग भी जेन-जी हैं। सेना में शामिल होने वाला युवा 20 से 25 वर्ष की आयु का होता है। हर साल सशस्त्र बलों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों की संख्या से कहीं अधिक होती है।’’
उन्होंने धार्मिक आयोजनों में युवाओं की भागीदारी का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत के युवा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘25 साल से कम उम्र के 25 करोड़ से अधिक युवा, जिन्हें आप जेन-जी कहते हैं, कुंभ में पहुंचे थे। किसी भी थिएटर में जाकर ‘हनुमान अंश’ फिल्म देखिए, आधे से अधिक दर्शक उसी आयु वर्ग के होंगे, जिसे जेन-जी कहा जाता है।’’
जैन ने कहा कि विहिप अलग विचार रखने वालों के साथ संवाद बनाए रखने में विश्वास रखता है, लेकिन एक छोटे समूह को देश की पूरी युवा आबादी की पहचान तय करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर जैन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्य 2029 से पहले इसे अपने-अपने यहां लागू करेंगे। जैन ने इसे संवैधानिक आवश्यकता बताया।
भाषा
संतोष पवनेश
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