(तस्वीरों के साथ जारी)
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का बृहस्पतिवार को यहां राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस अवसर पर मौजूद रहे।
यह तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सलामी मंच पर खड़ी हुईं और प्रधानमंत्री मोदी उनके पास खड़े थे।
तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड का दस्ता, भारत आईं मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े।
तकाइची प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं।
दोनों प्रधानमंत्री व्यापार, निवेश, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां ‘हैदराबाद हाउस’ में वार्ता करेंगे।
औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री तकाइची ने मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से मुलाकात की।
कई केंद्रीय मंत्रियों ने हाथ जोड़कर तकाइची का अभिवादन किया और उन्होंने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बाद में हाथ मिलाया और तस्वीरें खिंचवाईं।
तकाइची तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को नयी दिल्ली पहुंची थीं।
जापान की प्रधानमंत्री ने दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने आगमन की तस्वीरें साझा की थीं।
मोदी ने उनकी पोस्ट साझा करते हुए लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, भारत में आपका हार्दिक स्वागत है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आपकी पहली भारत यात्रा पर आपकी मेजबानी करके हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं कल आपके साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा को लेकर उत्सुक हूं, जिससे भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी और मजबूत होगी। हम अपने संयुक्त प्रयासों के जरिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उसके बाहर शांति, स्थिरता एवं समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।’’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा था कि यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ‘‘महत्वपूर्ण कदम’’ है।
विदेश मंत्रालय ने कहा था, ‘‘शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के सभी आयामों की समीक्षा करने और उन्हें मजबूत बनाने के साथ-साथ साझा हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगा।’’
भाषा सिम्मी वैभव
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