नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कहा है कि झारखंड में दुर्घटनाग्रस्त हुए लगभग 40 साल पुराने बीचक्राफ्ट सी90ए विमान में ‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’ या ‘फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर’ नहीं थे।
विमानों में इन उपकरणों को अनिवार्य रूप से लगाने का नियम उस वक्त लागू नहीं था, जब 1987 में इस विमान को उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र जारी किया गया था।
रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का बीचक्राफ्ट सी90ए विमान वीटी-एजेवी 23 फरवरी को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस विमान का संचालन रांची से दिल्ली के लिए एयर एम्बुलेंस के रूप में किया जा रहा था। उड़ान भरने के तुरंत बाद यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
झारखंड के चतरा जिले में हुई इस दुर्घटना में, विमान में सवार पांच लोगों और चालक दल के दो सदस्यों की मौत हो गई थी।
डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह विमान 1987 में निर्मित हुआ था और इसका उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र 20 जनवरी 2027 तक वैध था।
दुर्घटना के संभावित कारणों की जांच में जांचकर्ताओं के लिए एक बाधा यह हो सकती है कि विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था।
ब्लैक बॉक्स, जिसे कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) कहा जाता है, उड़ान के दौरान महत्वपूर्ण डेटा रिकॉर्ड करता है।
नियमों के अनुसार, 5,700 किलोग्राम से कम ‘टेक-ऑफ’ भार वाले विमानों के लिए अनिवार्य रूप से सीवीआर लगाना आवश्यक है, लेकिन केवल तभी जब उन्हें 1 जनवरी 2016 को या उसके बाद यह प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ हो।
इसी प्रकार, एफडीआर लगाना केवल उन विमानों के लिए अनिवार्य है जिनका ‘टेक-ऑफ’ भार 5,700 किलोग्राम से कम है और जिन्हें 1 जनवरी 1987 को या उसके बाद उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ हो।
भाषा
सुभाष माधव
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