उप्र : पुरानी रंजिश के चलते दोस्त की हत्या करने वाले व्यक्ति को आजीवन कारावास

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उप्र : पुरानी रंजिश के चलते दोस्त की हत्या करने वाले व्यक्ति को आजीवन कारावास

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 12:40 AM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 12:40 AM IST

लखनऊ, 25 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक स्थानीय अदालत ने पुरानी दुश्मनी के चलते अपने दोस्त की जलाकर हत्या करने के जुर्म में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अपर जिला सरकारी वकील विकास सिंह ने कहा कि अपर सत्र न्यायाधीश रोहित सिंह ने दीपक कुमार उर्फ करण रावत को दोषी ठहराते हुए उस पर 6.50 लाख रुपये के जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की आधी रकम पहचान के बाद मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी या उसके पिता को कानून के मुताबिक दी जाए। यह आदेश मंगलवार को पारित किया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अनुराग तिवारी की शिकायत पर 12 जुलाई 2012 को गुडम्बा पुलिस थाने में यह मामला दर्ज किया गया था। अनुराग तिवारी ने अपनी शिकायत में कहा कि उनका बेटा आशुतोष तिवारी 11 जुलाई 2012 की सुबह घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। खोजबीन के बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गयी। आशुतोष एक नेशनल बुक डिपो में काम करता था और बीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना चाहता था।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि घटना की शाम आशुतोष को आखिरी बार उसके दोस्त दीपक कुमार के साथ देखा गया था।

पूछताछ करने पर, दीपक कुमार ने आशुतोष को प्रवेश दिलाने के बहाने सिधौली में अपने पैतृक गांव ले जाने की बात कबूल की। उसने कथित तौर पर शराब में नींद की गोलियां मिलाकर आशुतोष को पिला दी। आशुतोष के बेहोश हो जाने के बाद आरोपियों ने उसके सिर पर डंडे से वार किया और फिर उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

बाद में उसकी निशानदेही पर आरोपी के गांव सिधौली स्थित उसके घर के आंगन से शव को बरामद कर लिया गया, जहां उसे दफनाया गया था। पूछताछ के दौरान, दीपक कुमार ने कहा कि वह आशुतोष तिवारी से दुश्मनी रखता था क्योंकि आशुतोष की बहन को प्रेम पत्र देने के बाद आशुतोष और उसके पिता ने उसकी पिटाई की थी।

सिंह ने कहा कि मामले में शामिल एक अन्य आरोपी को पहले किशोर घोषित किया गया था और उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया था।

भाषा

चंदन जफर रवि कांत