बचपन में बिछड़ने के 13 साल बाद परिवार से मिला झारखंड का एक युवक

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बचपन में बिछड़ने के 13 साल बाद परिवार से मिला झारखंड का एक युवक

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  • Publish Date - May 23, 2021 / 01:01 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:30 PM IST

दुमका, 23 मई (भाषा) नियति कब किसी व्यक्ति को कहां ले जाए इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। झारखंड के दुमका के रहने वाले दीपक देहरी के लिए यह कथन सच साबित हुआ है।

दीपक पांच साल की उम्र में अपने परिवार से बिछड़ गए थे और अब 13 साल बाद दोबारा परिवार से मिल पाए हैं।

बचपन में परिवार से बिछड़ने के बाद दीपक ने अपने गांव से करीब 1700 किलोमीटर दूर राजस्थान के बीकानेर में स्थित एक बाल गृह में रहकर 13 साल बिताए।

अब 18 साल के हो चुके दीपक ने वीडियो कॉल पर मसानजोर बांध और अपने गांव के दृश्यों को पहचान लिया। इसके बाद वह अपने परिवार से मिल पाया।

मसानजोर पुलिस स्टेशन के प्रभारी चंद्रशेखर चौबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पहाड़िया जनजाति से संबंध रखने वाले दीपक जब पांच साल के थे उनके पिता का निधन हो गया था। उसके बाद दीपक की मां ने उसे छोड़ दिया।

दीपक की एक चाची उसे उत्तर प्रदेश के हरदोई लेकर आ गयीं, लेकिन दीपक अपने गांव जाने के लिए बेचैन था। जोश में आकर दीपक वहां से भागकर ट्रेन में बैठ गया, लेकिन उसने गलत ट्रेन पकड़ ली और वह राजस्थान के बीकानेर पहुंच गया।

दीपक ने अगले 13 साल बीकानेर के समाज कल्याण विभाग की ओर से चलाए जा रहे बाल गृह में बिताए। दीपक प्राय: अपने बचपन की यादों के बारे में बात कर भावुक हो जाता था।

बाल गृह के अधीक्षक अरविंद आचार्य ने मसानजोर पुलिस से संपर्क किया और वीडियो कॉल के जरिए दीपक को गांव दिखाया।

मसानजोर बांध के नजदीक रहने वाले दीपक ने तुरंत अपने गांव को पहचान लिया। उसने बताया कि उसके पिता एक मछुआरे थे, दीपक ने अपने रिश्तेदारों के बारे में भी बताया।

दीपक के मामा ने भी उसे पहचान लिया। बीकानेर पुलिस ने जांच-पड़ताल के बाद दीपक को झारखंड पुलिस के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में उसके परिजनों को सौंप दिया।

परिवार से मिलने की खुशी पर दीपक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यहां अपने लोगों के बीच आकर मैं बहुत खुश हूं, जीविका के लिए मैं यहां कुछ भी काम कर लूंगा।’’

भाषा रवि कांत नीरज

नीरज