भुवनेश्वर, 30 अगस्त (भाषा) ओडिशा सरकार ने रविवार को कहा कि विधाानसभा की एक संयुक्त संसदीय समिति ने विधायकों के वेतन और भत्तों में संशोधन की वकालत की है।
समिति की राय राज्य सरकार द्वारा जनता के भारी विरोध के बाद विधायकों के वेतन और भत्तों में तीन गुना बढ़ोतरी करने के प्रावधान वाले विधेयक को वापस लिये जाने के बाद आई है।
संसदीय कार्य विभाग ने एक बयान में कहा कि समिति ने विधानसभा के मौजूदा और पूर्व सदस्यों के वेतन और भत्तों की समीक्षा की और इसकी तुलना दूसरे राज्यों की विधानसभाओं और संसद के सदस्यों को मिलने वाले लाभ से की।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष दूसरे राज्यों में विधायकों को मिलने वाले वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं से जुड़े दस्तावेज पेश किए।
बयान में कहा गया है, ‘‘दस्तावेजों की जांच के बाद संयुक्त समिति की राय है कि ओडिशा में मौजूदा और पूर्व विधायकों के वेतन ढांचे में बदलाव की जरूरत है।’’
ओडिशा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 26 मार्च को विधानसभा से पारित हुए चार विधेयक वापस ले लिये। इन विधेयकों में विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के वेतन, भत्ते और पेंशन में तीन गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। इन विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी मिलनी बाकी थी।
विधेयक में विधायकों के मासिक वेतन और भत्ते मौजूदा 1.11 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.45 लाख रुपये करने का प्रावधान था, जो देश में सबसे अधिक वेतन और भत्तों में से एक था।
सांसद वीरेंद्र प्रसाद वैश्य की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति में सांसद बिजय कुमार दुबे, बीना देवी, के गोपीनाथ, बाबू सिंह कुशवाह और रिचर्ड वानलालहमंगइहा, संसद निदेशक भटशाला जोशी, ओडिशा विधानसभा के अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी, संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग और विधानसभा सचिव सत्यब्रत राउत सदस्य हैं।
भाषा धीरज सुरेश
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