बेंगलुरु, 18 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना ने शनिवार को कहा कि आज के ज़माने में न्यायिक आज़ादी का मतलब सिर्फ़ बाहरी ताकत से स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि ‘एल्गोरिदम’ के असर से भी आज़ादी है।
उन्होंने कहा कि न्याय का भविष्य सिर्फ़ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से आकार नहीं ले सकता, बल्कि इसे न्यायाधीशों को तय करना होगा जो ‘टूल्स’ से समर्थित तो हो, फिर भी हमेशा संवैधानिक मूल्यों, कानून के राज और बराबरी तथा निष्पक्षता की प्रतिबद्धता से निर्देशित हो।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘‘कानून का शासन कोई तकनीकी अवधारणा नहीं है, यह एक नैतिक और संवैधानिक प्रतिबद्धता है जो निष्पक्षता, समानता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है।’’
न्यायमूर्ति नागरत्ना कर्नाटक राज्य न्यायिक अधिकारी संघ द्वारा आयोजित न्यायिक अधिकारियों के 22वें राज्यस्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं जिसका विषय ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में न्यायपालिका को पुन: आकार देना’ था।
उन्होंने कहा, ‘‘इस सारे बदलाव के बीच जो सिद्धांत बिल्कुल नहीं बदलना चाहिए, वह है कानून का राज। प्रौद्योगिकी कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, हमारी न्यायपालिका की बुनियाद नहीं बदल सकती और न ही बदलनी चाहिए।’’
समारोह में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू भी शामिल थे।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि एआई को न्याय के संरक्षक के रूप में न्यायाधीशों के अनुभव, विवेक और भूमिका का सम्मान करना चाहिए, और एआई पर अत्यधिक निर्भरता संज्ञानात्मक प्रभाव का एक रूप ले सकती है।
उन्होंने कहा कि एआई सूक्ष्म रूप से सूचना के प्रवाह और निर्णय लेने के तरीकों को प्रभावित करके मानव संज्ञानात्मक क्षमता के लिए खतरा पैदा करता है तथा यह व्यक्तियों की संज्ञानात्मक स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘‘इसलिए, न्यायिक स्वतंत्रता की पारंपरिक अवधारणा को अनुचित एआई प्रभाव से मुक्त रखने के लिए विकसित होना चाहिए। इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि न्यायाधीशों के पास तर्क पर अंतिम नियंत्रण बना रहे और एआई का उपयोग हर समय और हर चरण में सीमित रहे।’’
उन्होंने कहा कि आज के समय में न्यायिक आज़ादी का मतलब सिर्फ़ बाहरी ताकत से स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि ‘एल्गोरिदम’ के असर से भी आज़ादी है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि एआई व्यापक स्तर पर कानूनी सहायता प्रणालियों के कामकाज में सहयोग कर सकता है।
भाषा सुभाष पवनेश
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