न्यायमूर्ति वी. मोहना, सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से अलग हुईं

न्यायमूर्ति वी. मोहना, सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से अलग हुईं

न्यायमूर्ति वी. मोहना, सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से अलग हुईं
Modified Date: July 31, 2026 / 12:58 pm IST
Published Date: July 31, 2026 12:58 pm IST

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश वी. मोहना ने भ्रष्टाचार के एक नए मामले में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता वी. सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को स्वयं को अलग कर लिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने न्यायालय को न्यायमूर्ति मोहना के सुनवाई से अलग होने की जानकारी दी। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मामले की तात्कालिकता को देखते हुए वह न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची के साथ अपराह्न एक बजे याचिका पर सुनवाई करेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टासमैक) में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के नए मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध करने वाली बालाजी की याचिका पर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सहमति जताई थी।

मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन एवं सतर्कता निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा दर्ज टासमैक घोटाला मामले में बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

इसके तुरंत बाद वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और अमित आनंद तिवारी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का द्रमुक नेता की ओर से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बालाजी के खिलाफ किसी भी समय दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

बालाजी तमिलनाडु विधानसभा में कोयंबटूर दक्षिण सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

नयी प्राथमिकी के अनुसार, टासमैक में दुकानों और बार के आवंटन में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ।

बालाजी ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी में प्रवर्तन निदेशालय के हलफनामे और धनशोधन की जांच करने वाली एजेंसी की ओर से उच्चतम न्यायालय में दाखिल याचिका के अंश शब्दशः शामिल किए गए हैं।

याचिका में कहा गया कि प्राथमिकी में कई स्थानों पर स्वयं यह उल्लेख है कि सामग्री प्रवर्तन निदेशालय के जवाबी हलफनामे और याचिका से ली गई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता तिवारी ने बालाजी की ओर से कहा, ‘‘हमारी दलील है कि प्राथमिकी उन घटनाओं को लेकर दर्ज की गई है जो कथित तौर पर 2021 से 2025 के बीच हुईं। मेरे फरार होने की कोई आशंका नहीं है और हिरासत में पूछताछ की भी जरूरत नहीं है। मैं संबंधित विभाग का मंत्री था, जबकि टासमैक अपने अस्तित्व और कामकाज में एक स्वतंत्र निगम है।’’

उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बताया।

प्राथमिकी में करोड़ों रुपये की कथित सुनियोजित नकद रिश्वत योजना का विवरण दिया गया है। आरोप है कि बोतल आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने शराब बनाने वाली इकाइयों के लिए फर्जी या बढ़ा-चढ़ा कर बिल तैयार किए।

प्राथमिकी के अनुसार, टासमैक की खुदरा दुकानों ने ग्राहकों से संगठित तरीके से अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक राशि वसूली। सामान्य शराब की बोतलों पर 10 से 100 रुपये और विदेशी शराब पर 500 रुपये तक अधिक वसूले गए।

यह मामला भारतीय दंड संहिता, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (जिसमें 2018 में संशोधन किया गया था) की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 2018 में संशोधन किया गया था।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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