बेंगलुरु, 12 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार ने रविवार को पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष के. अब्दुल जब्बार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और उनके अधीन गठित समितियों को भंग कर दिया।
जब्बार ने शनिवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की। इससे एक दिन पहले, मुस्लिम नेताओं के एक समूह ने अपनी ही पार्टी के सदस्यों पर दावणगेरे दक्षिण में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार को हराने के लिए ‘‘षड्यंत्र’’ रचने का आरोप लगाया था।
पार्टी को लिखे अपने पत्र में जब्बार ने कहा कि अल्पसंख्यक मतदाता और पदाधिकारी कांग्रेस की रीढ़ हैं तथा वे बेहतर के हकदार हैं।
बाद में, पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ नेता पार्टी कार्यालय का इस्तेमाल इसी समुदाय के वरिष्ठ नेताओं पर हमला करने के मंच के रूप में कर रहे हैं।
विधान पार्षद जब्बार दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट चाहते थे।
शिवकुमार ने एक बयान में कहा, “के. अब्दुल जब्बार ने केपीसीसी (कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी) अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और वह तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त हो गए हैं। इसके अलावा, केपीसीसी अल्पसंख्यक विभाग समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।’’
दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के एक दिन बाद शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस के भीतर उस वक्त मतभेद देखने को मिला, जब मुस्लिम नेताओं के एक समूह ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने दावणगेरे दक्षिण से आधिकारिक उम्मीदवार को हराने के लिए ‘‘आंतरिक साजिश’’ रची है।
दावणगेरे दक्षिण में अल्पसंख्यक समुदाय की अच्छी खासी संख्या है।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने सभी पहलुओं पर विचार करने और मुस्लिम नेताओं को विश्वास में लेने के बाद मल्लिकार्जुन को उम्मीदवार बनाया था। इसके बावजूद, पार्टी के कुछ लोगों ने एक अभियान चलाया जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को टिकट न देकर उनके साथ ‘‘विश्वासघात’’ किया है।
विधान परिषद में मुख्य सचेतक सलीम अहमद, विधायक रिजवान अरशद और यासिर अहमद खान पठान, विधान पार्षद बिलकिस बानो और अन्य नेताओं ने शुक्रवार को एक संयुक्त प्रेसवार्ता में ‘‘आंतरिक साजिश’’ का आरोप लगाया।
खान ने खुले तौर पर दावणगेरे दक्षिण सीट से मुस्लिम उम्मीदवार की मांग की थी। शुरुआत में वह केरल चुनाव से संबंधित प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार से दूर रहे। हालांकि, बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के अनुरोध पर समर्थ के पिता और मंत्री एस एस मल्लिकार्जुन के साथ एक प्रेसवार्ता की।
दावणगेरे से होने के बावजूद जब्बार ने भी चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया था।
इस बीच, विधायक अरशद ने रविवार को कहा कि पार्टी नेतृत्व उन लोगों से अवगत है जिन्होंने कथित तौर पर कांग्रेस के मतों को विभाजित करने और भाजपा की मदद करने की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, सौभाग्यवश, इसका कोई असर नहीं हुआ है और कांग्रेस उम्मीदवार की जीत होगी।’’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी मुस्लिम को दावणगेरे दक्षिण से टिकट इसलिए नहीं मिला क्योंकि कुछ वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेताओं ने यह मांग की थी कि यह टिकट विशेष रूप से जब्बार के लिए हो, न कि समुदाय के किसी अन्य योग्य उम्मीदवार के लिए, जबकि जब्बार सभी को स्वीकार्य नहीं थे।
दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव बृहस्पतिवार को हुआ।
इन निर्वाचन क्षेत्रों के विधायकों- शमनुरु शिवशंकरप्पा और एच वाई मेती के निधन के बाद चुनाव कराना आवश्यक हो गया था।
भाषा नेत्रपाल सुभाष
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