कर्नाटक के मंत्रिमंडल ने वीबी-जी राम जी अधिनियम को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया: मंत्री

कर्नाटक के मंत्रिमंडल ने वीबी-जी राम जी अधिनियम को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया: मंत्री

कर्नाटक के मंत्रिमंडल ने वीबी-जी राम जी अधिनियम को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया: मंत्री
Modified Date: January 8, 2026 / 07:17 pm IST
Published Date: January 8, 2026 7:17 pm IST

बेंगलुरु, आठ जनवरी (भाषा) कर्नाटक सरकार के मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम को स्वीकार नहीं करने और मनरेगा को रद्द करने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया।

मंत्रिमंडल ने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) को ‘रद्द’ करने और उसकी जगह विकसित भारत—रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम (वीबी-जी राम जी अधिनियम) लाने के खिलाफ ‘जनता की अदालत’ में जाने का भी फैसला किया।

कैबिनेट के फैसले के बारे में संवाददाताओं को बताते हुए कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने कहा, “यह सर्वसम्मति से तय किया गया है कि (वीबी-जी राम जी) कानून को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।’’

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इस विषय पर एक कैबिनेट नोट में कहा गया है कि ‘वीबी-जी राम जी’ कानून संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के काम करने और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।

नोट में कहा गया है, “यह कानून संविधान से मिले पंचायतों के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करता है और संविधान के 73वें और 74वें संशोधन की भावना के खिलाफ है।’’

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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