न्यायालय ने कर्नाटक में 2012 के दुष्कर्म एवं हत्या मामले की नये सिरे से जांच का दिया आदेश

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न्यायालय ने कर्नाटक में 2012 के दुष्कर्म एवं हत्या मामले की नये सिरे से जांच का दिया आदेश

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  • Publish Date - September 21, 2026 / 09:57 PM IST,
    Updated On - September 21, 2026 / 09:57 PM IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2012 में कर्नाटक के धर्मस्थल नगर में 17 वर्षीय एक लड़की के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले की नये सिरे से जांच के लिए राज्य सरकार को विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का सोमवार को निर्देश देते हुए कहा कि मामले की जांच जिस तरीके से की गई, उसने उसकी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने निर्देश दिया कि नये सिरे से जांच तीन महीने के भीतर पूरी की जाए और कानून के अनुसार संबंधित अदालत के समक्ष पुलिस रिपोर्ट दाखिल की जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘प्रतिवादी संख्या एक – कर्नाटक राज्य दक्ष जांचकर्ताओं वाला एक विशेष जांच दल गठित करेगा, जो आधुनिक जांच तकनीक के इस्तेमाल से भली-भांति परिचित हों और जिसका नेतृत्व राज्य का एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करे।’’

पीठ ने कहा कि बेलथंगडी थाने, अपराध जांच विभाग (सीआईडी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उन जांच टीम का कोई भी अधिकारी, जो पहले की जांच से जुड़ा रहा हो, विशेष जांच दल का हिस्सा नहीं होगा।

पीठ ने यह आदेश पीड़िता की मां की ओर से दायर याचिका पर दिया।

सत्रह वर्षीय छात्रा नौ अक्टूबर 2012 को धर्मस्थल नगर के पास उजिरे में कॉलेज से घर लौटते समय लापता हो गई थी। अगले दिन उसका शव मिला था। लड़की का यौन उत्पीड़न और हत्या किये जाने के साक्ष्य मिले थे।

मामले की जांच स्थानीय पुलिस, कर्नाटक सीआईडी और बाद में सीबीआई ने की थी। मामले में अभियोजन का सामना करने वाले एकमात्र आरोपी संतोष राव को जून 2023 में सीबीआई की विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संबंधित प्राथमिकी में पहले ही मुकदमे का सामना कर चुके और सत्र अदालत द्वारा बरी किए जा चुके संतोष राव को आगे की जांच या अभियोजन का सामना नहीं करना होगा।

पीठ ने कहा, “यहां कही गई किसी भी बात को किसी व्यक्ति की भूमिका पर, यहां तक कि प्रथम दृष्टया भी, राय व्यक्त करने के रूप में नहीं समझा जाएगा। विशेष जांच दल इस आदेश में मामले के गुण-दोष पर कही गई किसी भी बात से प्रभावित हुए बिना जांच करेगा।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ बर्बरतापूर्वक दुष्कर्म और हत्या के मामले में जिस तरह जांच आगे बढ़ी तथा विभिन्न जांच एजेंसियों ने साक्ष्य जुटाने और उनका आकलन करने का काम किया, वह ‘‘न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरता है।’’

उसने कहा, ‘‘जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाया गया, उसे अपराध करने में असमर्थ माना गया। स्पष्ट रूप से जांच ऐसे तरीके से की गई जिससे पीड़िता के साथ अन्याय हुआ।’’

न्यायालय ने कहा कि वास्तविक अपराधी द्वारा जांच को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति पर झूठा आरोप लगने से हुए अन्याय की भरपाई की जा सकती है, लेकिन जिस पीड़िता के साथ बर्बरतापूर्वक दुष्कर्म करके उसकी हत्या कर दी गई, उसके साथ हुए अन्याय की भरपाई कभी नहीं हो सकती।

भाषा अमित सुभाष

सुभाष