बेंगलुरु, 11 अगस्त (भाषा) कर्नाटक में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के उस आदेश के खिलाफ किसानों और कन्नड़ संगठनों ने छिटपुट विरोध-प्रदर्शन किए, जिसमें राज्य को 12 अगस्त से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया है।
मांड्या में किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया, जबकि कन्नड़ संगठनों ने इस आदेश के विरोध में 13 अगस्त को कर्नाटक बंद का आह्वान किया।
सीडब्ल्यूएमए ने कर्नाटक को निर्देश दिया है कि वह कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के उस फैसले का पालन करे, जिसके तहत 15 दिनों तक रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी बिलिगुंडलु में छोड़ा जाना है।
इस आदेश के कारण किसानों और कन्नड़-समर्थक समूहों में भारी विरोध शुरू हो गया है। उन्होंने कर्नाटक सरकार से मांग की है कि वह इसे लागू करने से इनकार कर दे और तमिलनाडु को और पानी छोड़ने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए।
कन्नड़ चलवली वाटल पक्ष के संयोजक वाटल नागराज ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम किसी भी कीमत पर बंद रखेंगे। मैं सभी से अपील करता हूं कि वे हड़ताल के हमारे आह्वान का समर्थन करें।’’
मांड्या जिला किसान कल्याण संरक्षण समिति ने बुधवार को मांड्या में विश्वेश्वरैया की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है और किसानों, कन्नड़ संगठनों, श्रमिकों, महिलाओं तथा आम नागरिकों से इसमें भाग लेने की अपील की है।
एक किसान नेता ने कहा, ‘‘हमें कर्नाटक के किसानों के हितों की रक्षा करनी है। सरकार को किसी भी परिस्थिति में पानी नहीं छोड़ना चाहिए।’’ उन्होंने सीडब्ल्यूएमए के निर्देश को राज्य की जल सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
राज्य में 13 अगस्त को प्रस्तावित बंद के समर्थन में कन्नड़ संगठनों के उतरने के साथ ही आंदोलन के और तेज होने की संभावना है। इन संगठनों ने राज्यभर के लोगों से बंद में भाग लेने की अपील की है।
भाषा गोला सुरेश
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