Karnataka Government News: हिजाब पहनने की इजाजत, भगवा शॉल पर रोक.. यहां की सरकार के आदेश पर मचा बवाल, कई हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

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Karnataka Government News: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने बुधवार को शिक्षण संस्थानों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है।

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  • Publish Date - May 13, 2026 / 08:59 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 09:06 PM IST

Karnataka Government News/Image Credit: IBC24 X Handle

HIGHLIGHTS
  • कर्नाटक सरकार ने बुधवार को शिक्षण संस्थानों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है।
  • सरकार ने शिक्षण संस्थानों में लागू 'हिजाब पॉलिसी' को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया है।
  • सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना ने साफ़ किया है कि, शिक्षण संस्थानों में भगवा शॉल की अनुमति नहीं हो

Karnataka Government News: बेंगलुरु: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने बुधवार को शिक्षण संस्थानों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। कर्नाटक सरकार ने शिक्षण संस्थानों में लागू ‘हिजाब पॉलिसी’ को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया है। सीएम सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने 05 फरवरी 2022 को जारी किया आज्ञा अपना वो आदेश रद्द कर दिया, जिसने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया था।

शिक्षण संस्थानों में भाजपा सरकार ने लागू किया था ड्रेस कोड

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, पिछली भाजपा सरकार ने हिजाब विवाद के बाद 5 फरवरी, 2022 को शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड लागू किया था। वहीं नई अधिसूचना के मुताबिक अब छात्र-छात्राओं को निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म के साथ सीमित सामुदायिक, पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई है। (Karnataka Government News) नई अधिसूचना के मुताबिक, कर्नाटक के सभी सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, निजी शिक्षण संस्थानों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में यूनिफॉर्म व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी।

इन प्रतीकों को धारण कर सकेंगे छात्र

Karnataka Government News:  वहीं अब सभी छात्र निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ सीमित सामुदायिक, पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर सकेंगे। कर्नाटक सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि, ये प्रतीक यूनिफॉर्म के मूल उद्देश्य को प्रभावित नहीं करेंगे। सरकार ने जिन प्रतीकों की अनुमति दी है उनमें- हिजाब (हेडस्कार्फ), जनेऊ, शिवधारा, रुद्राक्ष और शरवस्त्र शामिल हैं। इसके अलावा अन्य पारंपरिक और सामुदायिक प्रतीकों को भी अनुमति दी गई है, बशर्ते वे अनुशासन, सुरक्षा या छात्रों की पहचान में बाधा न बनें।

शिक्षण संस्थानों में नहीं होगी भगवा शॉल की अनुमति

सिद्धारमैया सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना ने साफ़ किया है कि, शिक्षण संस्थानों में भगवा शॉल की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि उसे धार्मिक प्रतीक की श्रेणी में नहीं माना गया है, जबकि जनेऊ को अनुमति दी गई है। सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि, केवल पारंपरिक या धार्मिक प्रतीक पहनने के आधार पर किसी छात्र को स्कूल, कक्षा, परीक्षा हॉल या शैक्षणिक गतिविधियों में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा। (Karnataka Government News) सरकार ने यह भी कहा कि किसी छात्र को ऐसे प्रतीक पहनने या न पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हालांकि परीक्षाओं के दौरान राष्ट्रीय और राज्य स्तर के ड्रेस कोड नियम लागू किए जा सकते हैं।

स्कूलों और कॉलेजों को निष्पक्ष तरीके से नियम लागू करने के निर्देश

Karnataka Government News:  सरकार ने ई नीति के क्रियान्वयन में धर्म या समुदाय के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव न हो इसके लिए सभी स्कूलों और कॉलेजों को धर्मनिरपेक्ष, समान और निष्पक्ष तरीके से नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। स्कूल डेवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग कमेटी (SDMC), कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी (CDC) और शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पहनावे को लेकर किसी छात्र के साथ भेदभाव या अपमानजनक व्यवहार न हो। साथ ही कहा गया है कि संस्थानों में अनुशासन बनाए रखा जाए, लेकिन किसी भी छात्र को शिक्षा से वंचित न किया जाए।

सरकार ने अमान्य किए पुराने सर्कुलर, निर्देश, प्रस्ताव

कर्नाटक सरकार की तरफ से यह भी साफ़ किया गया है कि, नए आदेश के बाद पुराने सभी सर्कुलर, निर्देशों, प्रस्तावों या संस्थागत नियमों को अमान्य माना जाएगा। राज्य के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के आयुक्त और प्री-यूनिवर्सिटी शिक्षा विभाग के निदेशक को सभी संस्थानों में इसे लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं। (Karnataka Government News) बता दें कि 2022 में हिजाब विवाद के बाद स्कूल और कॉलेज प्रशासन को यूनिफॉर्म लागू करने का अधिकार दिया गया था। इसके बाद कई सरकारी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर आने वाली मुस्लिम छात्राओं को कक्षाओं में प्रवेश से रोका गया था। इसके विरोध में कई हिंदू छात्रों ने भगवा शॉल ओढ़कर आना शुरू कर दिया था, जिससे राज्यभर में विवाद बढ़ गया था।

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