कर्नाटक सरकार को कब्रिस्तान बनाने के लिए भी जमीन की किल्लत पड़ रही है: मंत्री

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कर्नाटक सरकार को कब्रिस्तान बनाने के लिए भी जमीन की किल्लत पड़ रही है: मंत्री

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 08:56 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 08:56 PM IST

बेंगलुरु, 16 मार्च (भाषा) कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि सरकार को कब्रिस्तानों के लिए भी जमीन की कमी का सामना करना पड़ रहा है और कुछ मामलों में इसके लिए जमीन खरीदनी पड़ रही है।

गौड़ा ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय कब्रिस्तानों के लिए पर्याप्त जगह न देने के कारण सरकार से नाराज हैं।

उन्होंने स्कूलों और खेल के मैदानों के लिए जमीन आवंटित करने में आ रही दिक्कतों का भी जिक्र किया।

मंत्री प्रश्नकाल के दौरान औराद के भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण के एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।

गौड़ा ने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में सभी सरकारों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सभी गांवों में उनकी जरूरतों के अनुसार कब्रिस्तान हों। यहां तक ​​कि उच्च न्यायालय ने भी इस पर जोर दिया है। फिर भी, हम कुछ जगहों पर कब्रिस्तान के लिए स्थान उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।’’

उन्होंने कहा कि किसानों और अन्य विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपलब्ध सभी जमीन देने के बाद, सरकार के पास अब कब्रिस्तानों के लिए जमीन नहीं बची है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन वर्षों में कब्रिस्तानों के लिए सरकार को 58 करोड़ रुपये की लागत से जमीन खरीदनी पड़ी। विभिन्न उद्देश्यों के लिए जमीन देने के कारण अब हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं कि हमें अंतिम संस्कार के लिए जमीन खरीदनी पड़ रही है।’’

मंत्री ने कहा कि विभिन्न उद्देश्यों के लिए जमीनें दान में देने के बाद, प्रशासन को भीख मांगते हुए जमीन की मांग करनी पड़ रही है।

हिंदुओं में कुछ लोग शवों को दफनाते हैं और कुछ लोग उन्हें जलाते हैं। बेंगलुरु के आसपास के इलाकों में, जो लोग पहले शवों को दफनाते थे, अब दफनाने के लिए जगह न होने के कारण उन्होंने शवों को जलाना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा, “लेकिन, दो अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम और ईसाई) में शवों को जलाने का रीति नहीं है। हमें उन्हें जमीन देनी होगी। जमीन न देने पर वे अब हमसे नाराज़ हैं। जब हम कहते हैं कि जमीन नहीं है, तो कोई नहीं समझता।’’

हालांकि, गौड़ा ने ज़ोर देकर कहा कि विभाग स्कूलों और कब्रिस्तान जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जगह आरक्षित करने की दिशा में काम करेगा।

भाषा राखी नरेश सुरेश

सुरेश