कर्नाटक सरकार ने किशारियों के गर्भधारण के सभी मामलों का ऑडिट अनिवार्य किया
कर्नाटक सरकार ने किशारियों के गर्भधारण के सभी मामलों का ऑडिट अनिवार्य किया
बेंगलुरु, सात अप्रैल (भाषा) कर्नाटक सरकार ने किशोरियों के गर्भधारण के सभी मामलों का ऑडिट अनिवार्य करने का आदेश मंगलवार को जारी किया, जिसका उद्देश्य 10 से 18 साल तक की लड़कियों के गर्भधारण के अंतर्निहित कारणों को व्यवस्थित रूप से पता लगाना, समीक्षा करना और उनका समाधान करना है।
इस आदेश के तहत राज्य में 10 से 18 वर्ष तक की लड़कियों के गर्भधारण का तालुक स्वास्थ्य अधिकारी (टीएचओ) द्वारा ऑडिट अनिवार्य किया गया है।
इस कदम का उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण विभागों के समग्र प्रयासों से ऐसे मामलों की प्रारंभिक पहचान, परामर्श और निवारक उपायों को मजबूत करना है तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) जैसे मौजूदा कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाना है।
आदेश में कहा गया है, ‘‘किशोरावस्था में गर्भधारण महत्वपूर्ण जन स्वास्थ्य और सामाजिक चिंता का विषय बना हुआ है तथा उसका मातृ स्वास्थ्य, नवजात शिशु के स्वास्थ्य परिणाम और सामाजिक-आर्थिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है।”
इसमें यह भी बताया गया है कि 10 से 18 वर्ष तक की लड़कियों के गर्भधारण से मातृत्व जटिलताएं एवं प्रतिकूल प्रसव परिणाम सामने आते हैं तथा किशोरियों के स्कूल छोड़ने एवं सामाजिक रूप से असुरक्षा बोध का खतरा बढ़ जाता है।
आदेश के अनुसार, राज्य में किशोरियों के गर्भधारण के सभी मामलों की सूचना सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) मंच पर अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए।
‘ऑडिट ढांचा’ के तहत विवाह की आयु, शैक्षिक स्थिति, प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, गर्भनिरोधक उपायों की सुलभता और पारिवारिक कमजोरियों समेत कई सामाजिक-चिकित्सा कारकों की जांच की जायेगी।
सरकार ने निर्देश दिया कि स्नेहा केंद्रों समेत विभिन्न माध्यम से दी जाने वाली परामर्श सेवाओं, गर्भनिरोधक उपायों की सुलभता और स्कूल छोड़ने वाले किशोरियों, प्रवासियों और सामाजिक रूप से वंचित परिवारों जैसे कमजोर किशोर समूहों तक लक्षित पहुंच को मजबूत किया जाना चाहिए।
भाषा
राजकुमार सुरेश
सुरेश

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