कर्नाटक : पशु चिकित्सक भर्ती परीक्षा में अनियमितता से जुड़े मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई
कर्नाटक : पशु चिकित्सक भर्ती परीक्षा में अनियमितता से जुड़े मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई
बेंगलुरु, 28 जुलाई (भाषा) कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा पशु चिकित्सा अधिकारियों के 400 पदों को भरने के लिए आयोजित परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में दर्ज मामलों की जांच अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को सौंपी गयी है। राज्य के गृहमंत्री प्रियंक खरगे ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने भरोसा दिया कि मामले की गहन जांच की जाएगी और जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उन्हें कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।
प्रियंक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘निष्पक्ष, निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए, बेंगलुरु शहर के विधान सौध पुलिस थाना में केपीएससी के खिलाफ कर्नाटक लोक परीक्षा (भर्ती में भ्रष्टाचार और अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023 की धारा 10 के तहत दर्ज दो मामलों की जांच सीआईडी को सौंप दी गई है।’’
यह घोषणा राज्य में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)द्वारा पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या कर्नाटक उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग के बीच आई है।
इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, केपीएससी के अन्य अधिकारियों और 29 चयनिक अभ्यर्थियों को नामजद किया गया है।
केपीएससी ने रविवार को पशु चिकित्सा अधिकारी पदों के लिए चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची कथित अनियमितताओं की आंतरिक जांच पूरी होने तक प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया।
आरोपों की जांच के लिए, आयोग ने एक वरिष्ठ सदस्य की अध्यक्षता में एक आंतरिक जांच उप-समिति का गठन किया है। केपीएससी के मुताबिक यह फैसला रविवार को हुई एक आपातकालीन बैठक में लिया गया। यह बैठक 24 जुलाई को विधान सौध पुलिस थाने में दी गई तहरीर और 25 जुलाई को औपचारिक प्राथमिकी दर्ज होने के बाद बुलाई गई थी।
पशु चिकित्सकों के एक समूह ने शिकायत में दावा किया है कि बिचौलियों ने कई अभ्यर्थियों से संपर्क किया और नौकरी दिलाने के एवज में 70 लाख से 80 लाख रुपये तक की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ परीक्षाएं रिजॉर्ट में आयोजित की गई थीं। शिकायकर्ताओं ने कुछ चयनित अभ्यर्थियों को मिले अंकों पर सवाल उठाए और दावा किया कि नतीजों ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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