कर्नाटक के विधायक कुलकर्णी को हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित किया गया

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कर्नाटक के विधायक कुलकर्णी को हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित किया गया

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  • Publish Date - May 2, 2026 / 07:43 PM IST,
    Updated On - May 2, 2026 / 07:43 PM IST

बेंगलुरु, दो मई (भाषा) कर्नाटक विधानसभा ने भाजपा नेता योगेशगौड़ा गौदर की हत्या के मामले में दोषी पाए जाने के बाद कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की अयोग्यता के संबंध में शनिवार को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

पूर्व मंत्री इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

अधिसूचना में कहा गया कि कर्नाटक के धारवाड़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विनय कुलकर्णी को दोषसिद्धि की तिथि, यानी 15 अप्रैल, 2026 से कर्नाटक विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया जाता है।

इसमें कहा गया कि यह अयोग्यता उनकी रिहाई के बाद छह वर्षों तक जारी रहेगी, बशर्ते कि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर रोक न लगा दी जाए।

अधिसूचना में कहा गया कि इस प्रकार कर्नाटक विधानसभा की एक सीट रिक्त हो गई है।

दो मौजूदा विधायकों की मृत्यु के कारण 224 सदस्यीय विधानसभा की दो अन्य सीटों को भरने के लिए 9 अप्रैल को उपचुनाव हुआ था। परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

गत 15 अप्रैल को न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने कुलकर्णी और अन्य को आपराधिक साजिश तथा हत्या सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद, 17 अप्रैल को अदालत ने कुलकर्णी और इस मामले में दोषी ठहराए गए 15 अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला 15 जून, 2016 को धारवाड़ में भाजपा जिला पंचायत सदस्य गौदर की हत्या से संबंधित है। उस समय कुलकर्णी मंत्री थे। भाड़े के हमलावरों ने धारवाड़ के सप्तपुर स्थित गौदर के जिम में उन पर हमला किया और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी।

गौदर के परिवार और अन्य लोगों की मांग के बाद, तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2019 में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया।

सीबीआई ने 2020 में एक पूरक आरोपपत्र दायर किया, जिसमें विनय कुलकर्णी को ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ बताया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने योगेशगौड़ा गौदर को धारवाड़ में एक उभरते राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा और उन्हें खत्म करने के लिए हमलावरों को सुपारी दी।

कुलकर्णी को सीबीआई ने 2020 में गिरफ्तार किया था। उन्हें अगस्त 2021 में उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी, जिनमें धारवाड़ जिले में प्रवेश पर प्रतिबंध भी शामिल था। हालांकि, जून 2025 में उच्चतम न्यायालय ने गवाहों को प्रभावित करने और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों के बाद उनकी जमानत रद्द कर दी।

कुलकर्णी ने जनवरी 2026 में फिर से जमानत के लिए अर्जी दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने न्यायिक औचित्य का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया।

हालांकि, सभी गवाहों से पूछताछ हो जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने 27 फरवरी को उन्हें जमानत दे दी।

भाषा वैभव नेत्रपाल

नेत्रपाल