कश्मीरी पंडितों का उनके घर पर हमेशा स्वागत है : फारूक अब्दुल्ला

कश्मीरी पंडितों का उनके घर पर हमेशा स्वागत है : फारूक अब्दुल्ला

कश्मीरी पंडितों का उनके घर पर हमेशा स्वागत है : फारूक अब्दुल्ला
Modified Date: January 19, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: January 19, 2026 5:02 pm IST

जम्मू, 19 जनवरी (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों का घाटी में अपने घर लौटने का हमेशा स्वागत है।

विस्थापित समुदाय ने जम्मू में अपने पलायन की 36वीं बरसी मनाई और अपनी वापसी तथा पुनर्वास पर एक व्यापक नीति की मांग को दोहराया।

हालांकि, कश्मीरी पंडितों के वर्तमान में देश के अन्य हिस्सों में नये सिरे से जिंदगी की शुरुआत करने का हवाला देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने इस बात को लेकर संदेह जताया कि क्या समुदाय अब वापस आना चाहेगा?

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इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में, जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व ने हमेशा घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास का समर्थन किया है क्योंकि कश्मीर इस समुदाय के बिना अधूरा है।

कश्मीरी पंडित 19 जनवरी को ‘नरसंहार दिवस’ के रूप में मनाते हैं। यह दिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा दी गई धमकियों और हत्याओं के कारण कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के 1990 में हुए पलायन की याद दिलाता है।

समुदाय के सदस्यों ने घाटी के भीतर अपने लिए एक अलग भू-भाग समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर यहां विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किए।

यहां नेकां के दो दिवसीय कार्यक्रम से इतर अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि कई कश्मीरी पंडित परिवारों ने घाटी को नहीं छोड़ा तथा अपने गांवों और इलाकों में शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

घाटी में वापस लौटने एवं पुनर्वास के समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “वे (कश्मीर) कब लौटेंगे? उन्हें कौन रोक रहा है? कोई उन्हें नहीं रोक रहा है। उन्हें वापस आना चाहिए, क्योंकि यही उनका घर है। कई कश्मीरी पंडित वर्तमान में घाटी में रह रहे हैं और उन्होंने अपने गांव नहीं छोड़े हैं।”

‘यूथ 4 पनुन कश्मीर’ के बैनर तले सैकड़ों कश्मीरी पंडितों ने रविवार शाम जगती कैंप के पास जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। वे घाटी में अपनी वापसी के लिए एक अलग क्षेत्र की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों का नरसंहार होने की बात स्वीकार करने संबंधी विधेयक को संसद में पारित करने की मांग भी की।

विस्थापित कश्मीरी पंडितों की मांगों के बारे में पूछे जाने पर, अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया था कि सरकार उनके लिए आवास का निर्माण कराएगी और आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के जाने के बाद, इस प्रस्ताव का कार्यान्वयन करना केंद्र सरकार के हाथ में था।

उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि नेकां के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास का हमेशा समर्थन किया है।

‘ऑल स्टेट कश्मीरी पंडित कॉन्फ्रेंस’ (एएसकेपीसी) के महासचिव पी.के. रैना ने बताया कि समुदाय पिछले 36 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

यहां हो रहे विरोध प्रदर्शनों में से एक का नेतृत्व करते हुए रैना ने कहा, ‘‘हम यहां अपनी मातृभूमि में सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास का मार्ग प्रशस्त करने वाली नीति की मांग को दोहराने के लिए एकत्रित हुए हैं। हमने आतंकवादी हमलों में अपनी जान गंवाने वाले सभी समुदाय के सदस्यों को श्रद्धांजलि भी दी।’’

भाषा यासिर मनीषा

मनीषा


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