निर्वाचित सरकार को दूर रखने से आतंकी संगठनों की सूचनाओं का प्रवाह बाधित होता है: उमर

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निर्वाचित सरकार को दूर रखने से आतंकी संगठनों की सूचनाओं का प्रवाह बाधित होता है: उमर

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 07:55 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 07:55 PM IST

(सुमीर कौल)

श्रीनगर, सात मई (भाषा) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘‘अलग-थलग रहकर काम करने’’ के खिलाफ आगाह करते हुए सुरक्षा तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच की दूरी को उजागर किया है तथा जोर देकर कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों का समाधान केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं किया जा सकता।

अब्दुल्ला ने यहां पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद के प्रभावों के बारे में बात की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।

उन्होंने आतंकवाद रोधी उपायों और पर्यटन पुनरुद्धार की जटिलताओं के बारे में बात की और कहा कि निर्वाचित सरकार को कानून-व्यवस्था तंत्र से ‘‘पूरी तरह से अलग’’ रखना महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान-प्रदान में बाधा डालता है।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘समस्या यह है कि आप सुरक्षा स्थिति को केवल सुरक्षा का मामला मानकर उससे निपटने की कोशिश कर रहे हैं। यह तरीका कभी कारगर नहीं होगा। आतंकवाद के कारण और उसके प्रभाव, दोनों का व्यापक समुदाय से गहरा संबंध होता है।’’

मुख्यमंत्री ने कई महीनों से चकमा देते आ रहे आतंकी मॉड्यूल का श्रीनगर पुलिस द्वारा भंडाफोड़ किए जाने का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘और इसलिए, जब आप अलग-थलग होकर काम करते हैं, जब चुनी हुई सरकार और चुने हुए प्रतिनिधि सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था तंत्र से पूरी तरह से कटे रहते हैं, तो अंततः यही स्थिति उत्पन्न होती है।’’

कानून-व्यवस्था तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी पर तीखी टिप्पणी करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि दोनों के बीच खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि एक पुलिस अधिकारी द्वारा किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को ‘सल्यूट’ करना जैसी सामान्य पेशेवर शिष्टाचार की बात भी पेशेवर असहजता का कारण बन गई है।

उन्होंने इस विरोधाभास पर हंसते हुए कहा, ‘‘आजकल एक पुलिस अधिकारी किसी विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री को सल्यूट करने से पहले दो बार सोचता है… पहले तो बेचारा सोचता है कि उसे सल्यूट करना चाहिए या नहीं। फिर, अगर हिम्मत जुटाकर सल्यूट कर भी लेता है, तो दाएं-बाएं देखता है और सोचता है: ‘क्या किसी ने मुझे देख लिया? क्या मेरी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी?’ यही वो स्थिति है जिसका सामना आप कर रहे हैं।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि जब पुलिस को ही यह नहीं पता होता कि उसे निर्वाचित सरकार के नागरिक कार्यों का हिस्सा होना चाहिए या नहीं, तो सूचनाओं का आदान-प्रदान भी थोड़ा समस्या पैदा करने वाला हो जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘और मैं फिर से यही कहना चाहता हूं कि आप आतंकवाद या कानून व्यवस्था की समस्या को केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं देख सकते। उदाहरण के लिए, देखें कि एलजी (मनोज सिन्हा) आजकल नशामुक्त अभियान के तहत क्या कर रहे हैं। मादक पदार्थों की तस्करी मुख्य रूप से एक सुरक्षा समस्या है। यह मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर में मादक पदार्थों के प्रवेश को रोकने की प्रवर्तन संबंधी समस्या है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन वह पदयात्रा क्यों कर रहे हैं? वह आम जनता को इसमें क्यों शामिल कर रहे हैं? क्योंकि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, है ना? यह कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक सामाजिक समस्या है। आतंकवाद के मामले में भी यही सच है। यह कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी समस्या है। लेकिन यह सिर्फ सुरक्षा से जुड़ी समस्या नहीं है।’’

आतंकी मॉड्यूल और खुफिया जानकारी जुटाने की प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि उन्हें अक्सर अपनी खुफिया जानकारी ट्विटर (एक्स) से मिलती है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद को केवल एक सुरक्षा मुद्दे के रूप में देखना, जिसमें व्यापक समुदाय को उनके प्रतिनिधियों के माध्यम से शामिल नहीं किया जाता, एक त्रुटिपूर्ण रणनीति है।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन पुनरुद्धार करने के ‘नाजुक’ कार्य पर भी प्रकाश डाला, जिसे पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन में हुई ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ घटना के बाद झटका लगा है।

उन्होंने कहा कि हालांकि घरेलू पर्यटकों के आगमन में वृद्धि हुई है, लेकिन यह क्षेत्र ‘‘भू-राजनीतिक स्थिति का शिकार’’ बना हुआ है। अब्दुल्ला ने कहा कि ईरान में संघर्ष का बुकिंग पर ‘‘नकारात्मक प्रभाव’’ पड़ा है क्योंकि कई संभावित यात्री कोविड-19 जैसे लॉकडाउन से डरते हैं।

अब्दुल्ला ने सिर्फ ‘‘संख्या और आगमन’’ पर ध्यान केंद्रित करने से इनकार करते हुए कहा कि वह उस ‘‘प्रचार’’ से बचना चाहते हैं जिसने पिछले साल की अस्थिर स्थिति में योगदान दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘पर्यटकों का विश्वास वापस लाने में समय लगता है…आप इसे एक सप्ताह या एक महीने में वापस नहीं ला सकते। हालांकि लोग पिछले साल की तुलना में अधिक आश्वस्त हैं, हम समझते हैं कि अभी और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अपने कार्यक्षेत्र की ‘‘सीमाओं’’ से अवगत है, लेकिन भय के माहौल को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि ‘ट्रेकर्स’ और घरेलू पर्यटक दोनों ही अच्छी-खासी संख्या में घाटी में लौट सकें।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश