तिरुवनंतपुरम, 24 फरवरी (भाषा) केरल विधानसभा ने मंगलवार को निर्णय लिया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा अध्यक्ष को भेजे गए उन पत्रों पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है, जिनमें राज्यपाल द्वारा पढ़े गए अभिभाषण को ही आधिकारिक संस्करण मानने को कहा गया।
विधानसभा अध्यक्ष ए एन शमशीर ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के इस संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण के आधार पर यह निर्णय सुनाया।
विजयन ने सदन में कहा कि अतीत में ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब राज्यपालों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अभिभाषण के कुछ अंशों पर स्पष्टीकरण मांगा या असहमति जताई।
उन्होंने कहा, “यह परंपरा रही है कि जब भी पूर्व में किसी राज्यपाल ने अभिभाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ने से परहेज किया, तो अध्यक्षों ने मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत संस्करण को ही आधिकारिक माना।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार राज्यपाल ने अभिभाषण के किसी भी हिस्से को लेकर अपनी असहमति से उन्हें अवगत नहीं कराया। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत अभिभाषण में एकतरफा बदलाव कर उसे सदन में पढ़ने का उदाहरण पहले कभी नहीं देखा गया और संसदीय लोकतंत्र में इसे संवैधानिक नहीं माना जा सकता।
विजयन ने कहा कि पूर्व की परंपराओं और उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों को देखते हुए राज्यपाल के पत्रों को सदन में विचारार्थ रखने की आवश्यकता नहीं है।
अध्यक्ष शमसीर ने कहा, “मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के मद्देनजर विधानसभा ने निर्णय लिया है कि राज्यपाल द्वारा अध्यक्ष को भेजे गए पत्रों पर विचार करने की जरूरत नहीं है।’’
गौरतलब है कि 20 जनवरी को बजट सत्र की शुरुआत से पहले अपने अभिभाषण के दौरान राज्यपाल अर्लेकर ने उन अंशों को छोड़ दिया था, जिनमें भारतीय जनता पार्टी शासित केंद्र सरकार की वित्तीय नीति की आलोचना और राजभवन में मंजूरी के लिए लंबित विधेयकों का उल्लेख था। इसके अलावा उन्होंने अभिभाषण में एक नया अंश भी जोड़ा था।
राज्यपाल के अभिभाषण के बाद मुख्यमंत्री विजयन ने अध्यक्ष से अनुरोध किया था कि मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत मूल अभिभाषण को ही आधिकारिक संस्करण के रूप में स्वीकार किया जाए और उसमें से किसी अंश को हटाने या जोड़ने को मान्यता न दी जाए।
अध्यक्ष ने तब भी कहा था कि सदन की पूर्व परंपराओं के अनुसार मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत पाठ में से किसी अंश को हटाए जाने या कुछ जोड़े जाने को आधिकारिक मान्यता नहीं दी जाती और इस बार भी वही प्रक्रिया लागू होगी।
भाषा मनीषा वैभव
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