तिरुवनंतपुरम, 23 मार्च (भाषा) केरल में सोमवार को उस वक्त एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब निर्वाचन आयोग के एक पत्र पर भाजपा की प्रदेश इकाई की मुहर लगी पाई गई, जिसके बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं।
यह विवाद उस वक्त सामने आया जब माकपा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह मुद्दा उठाया। इसने 19 मार्च 2019 को देश की राजनीतिक पार्टियों को भेजे गए एक पत्र के साथ संलग्न शपथपत्र साझा किया, जिस पर आयोग की आधिकारिक मुहर की जगह प्रदेश भाजपा की मुहर लगी हुई थी।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आयोग ने कहा कि यह ‘‘पूरी तरह एक लिपिकीय त्रुटि’’ थी और इसे ‘‘तुरंत सुधार लिया गया था।’’
माकपा ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘क्या भाजपा ने अब सारे दिखावे छोड़ दिए हैं?’’
इसने यह भी कहा, ‘‘यह कोई रहस्य नहीं है कि एक ही शक्ति केंद्र भारत निर्वाचन आयोग और भाजपा, दोनों को नियंत्रित करता प्रतीत होता है। फिर भी, कम से कम दो अलग-अलग डेस्क की औपचारिकता तो बनाए रखें।’’
पार्टी ने आरोप लगाया, ‘‘मुहरें यूं ही बदली जा रही हैं। निर्वाचन आयोग के पत्र पर भाजपा की मुहर!’’ इसने टिप्पणी की, ‘‘पुराने आरोप की तरह कि -आप कोई भी बटन दबाएं, कमल ही दिखाई देता है- वैसा ही एक और ‘संयोग’ सामने आया है।’’
माकपा ने दावा किया कि यह दस्तावेज़ ‘‘कई पार्टियों को प्राप्त हुआ था’’ और ‘‘कम से कम दो प्राप्तकर्ताओं से इसका मिलान (क्रॉस-वेरिफिकेशन) किया गया’’। पार्टी ने यह भी कहा कि कि ईमेल आयोग के एक आधिकारिक स्रोत से भेजा गया था।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा, ‘‘हमारे संज्ञान में आया है कि निर्वाचन आयोग का एक पत्र, जिस पर भाजपा की मुहर लगी है, विभिन्न मलयालम समाचार चैनलों पर प्रसारित किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) का कार्यालय स्पष्ट करता है कि यह पूरी तरह एक लिपिकीय त्रुटि थी, जिसे तुरंत सुधार लिया गया था।’’
बयान में कहा गया, ‘‘त्रुटिपूर्ण दस्तावेज की वापसी का नोटिस सभी राजनीतिक दलों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया था।’’
भाषा सुरेश दिलीप
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