केरल : अदालत ने दिया बालीतर्पणम अनुष्ठान के लिए व्यवस्था की नयी रूपरेखा बनाने का निर्देश

केरल : अदालत ने दिया बालीतर्पणम अनुष्ठान के लिए व्यवस्था की नयी रूपरेखा बनाने का निर्देश

केरल : अदालत ने दिया बालीतर्पणम अनुष्ठान के लिए व्यवस्था की नयी रूपरेखा बनाने का निर्देश
Modified Date: August 6, 2026 / 01:34 pm IST
Published Date: August 6, 2026 1:34 pm IST

कोच्चि, छह अगस्त (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने कोल्लम जिले के तिरुमुल्लावरम समुद्र तट पर 12 अगस्त को होने वाले बालीतर्पणम अनुष्ठान के लिए करीब दो लाख श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नयी रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की पीठ ने त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) द्वारा तैयार रूपरेखा में कमियां पाए जाने के बाद इसे नये सिरे से तैयार निर्देश दिया।

‘बालीतर्पणम’ हिंदू धर्म का एक अनुष्ठान है, जिसमें पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए उनका तर्पण किया जाता है। मलयालम माह ‘करकिडकम’ में इसका विशेष महत्व होता है और इसे ‘करकिडका वावु बाली’ भी कहा जाता है।

अदालत ने कहा कि बोर्ड की योजना में प्रस्तावित शेडों के आकार तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए निर्धारित मार्गों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

पीठ ने कहा, ‘‘सीमित क्षेत्र में करीब दो लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए यह आवश्यक है कि अधिकारी स्पष्ट रूप से तय करें और चिह्नित करें कि श्रद्धालु किस प्रकार बालीतर्पणम स्थल में प्रवेश करेंगे, अनुष्ठान करेंगे, इसके बाद स्नान के लिए जाएंगे और फिर सुरक्षित, व्यवस्थित तथा निर्बाध तरीके से बाहर निकलेंगे।’’

अदालत ने कहा कि पैदल आवाजाही के लिए यथासंभव पर्याप्त और अवरोध रहित गलियारे निर्धारित किए जाने चाहिए।

पीठ ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए प्रस्तावित शेडों का आकार स्पष्ट रूप से तय होना चाहिए, ताकि उनके निर्माण से श्रद्धालुओं की आवाजाही या आपातकालीन सेवाओं की पहुंच में कोई बाधा न आए।

अदालत ने कहा, ‘‘प्रशासन को ध्यान रखना चाहिए कि यह एक बार होने वाला आयोजन है। यदि इस स्तर पर समुचित व्यवस्था कर ली जाती है, तो भविष्य में आवश्यक कार्य काफी कम हो जाएगा।’’

पीठ ने निर्देश दिया कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और कोल्लम के नगर नियोजक द्वारा तैयार किए जाने वाले नए लेआउट में त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड, बालीतर्पणम भूमि संरक्षण ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद द्वारा प्रस्तावित प्रत्येक शेड का सटीक स्थान, आकार और क्षमता स्पष्ट रूप से दर्शाई जाए।

अदालत ने कहा कि संशोधित रूपरेखा में पैदल मार्गों की चौड़ाई, आवाजाही के गलियारे, पहुंच मार्ग, एम्बुलेंस मार्ग, पुलिस और चिकित्सा नियंत्रण कक्ष, पूछताछ केंद्र, अग्निशमन एवं सुरक्षा सहायता केंद्र, शौचालय, पेयजल केंद्र तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाओं का भी पैमाने के अनुसार स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

पीठ ने कहा कि प्रत्येक संरचना और मार्ग का आकार सटीक रूप से दर्शाया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो।

अदालत ने निर्देश दिया कि नयी रूपरेखा यथाशीघ्र अंतिम रूप से तैयार कर ली जाए, ताकि 11 अगस्त से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा सकें।

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई सात अगस्त को निर्धारित करते हुए उस दिन संशोधित नक्शा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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