इडुक्की (केरलम), तीन सितंबर (भाषा) केरलम ने मुल्लापेरियार बांध की व्यापक सुरक्षा समीक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति से अगस्त 2025 में तय किए गए कार्यादेश (टीओआर) के अनुसार ही समीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह किया है।
अंतरराज्यीय जल मुद्दों पर राज्य सरकार के सलाहकार जेम्स विल्सन ने यह जानकारी दी। विल्सन ने बुधवार शाम यहां संवाददाताओं से कहा कि समिति ने हाल में मुख्य बांध, बेबी बांध, मिट्टी के बांध और स्पिलवे का स्थल निरीक्षण किया तथा केरल और तमिलनाडु दोनों के पक्ष सुने।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपनी सुरक्षा संबंधी सभी चिंताओं को समिति के समक्ष विस्तार से रखा है। हमारी मुख्य मांग है कि सुरक्षा समीक्षा अगस्त 2025 में तय किए गए कार्यादेश के अनुसार ही सख्ती से की जाए।’’
विल्सन ने कहा, ‘‘केरलम सरकार जिन मुद्दों को समिति के समक्ष उठाना चाहती थी, हमने उन सभी को विस्तार से रखा। हमने बाढ़, भूकंपीय अध्ययन और विस्तृत जांच के लिए बांध से नमूने एकत्र करने की आवश्यकता के बारे में भी बताया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘समिति ने कहा है कि वह केरलम द्वारा उठाई गई चिंताओं पर विचार करेगी। वास्तव में इन पर विचार किया जाएगा या नहीं, यह समिति के अधिकार क्षेत्र में आता है।’’
विल्सन के अनुसार, केरल की चिंताएं मोटे तौर पर चार प्रमुख क्षेत्रों—जल विज्ञान संबंधी सुरक्षा, संरचनात्मक सुरक्षा, भूकंपीय सुरक्षा और बांध से पानी के रिसाव से जुड़े मुद्दों—से संबंधित हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य ने पिछली जांचों में रही कमियों की ओर भी समिति का ध्यान दिलाया है। उन्होंने समिति के समक्ष अपनी चिंताएं रखने का अवसर दिए जाने पर संतोष जताया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने समिति के समक्ष तकनीकी रूप से ठोस मुद्दे रखे हैं। तमिलनाडु ने भी अपना पक्ष रखा है।’’
समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बलराज जोशी कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त किए जाने के बाद समिति मुल्लापेरियार बांध की व्यापक सुरक्षा समीक्षा कर रही है।
जोशी ने मंगलवार को कहा था कि समिति 10 से 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) को सौंप देगी।
बांध की सुरक्षा को लेकर केरलम और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद है। केरलम का कहना है कि बांध कमजोर है, जबकि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु का तर्क है कि बांध सुरक्षित है।
भाषा मनीषा वैभव
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