केरल के राज्यपाल ने राज्य में मलयाली को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाने संबंधी विधेयक पर हस्ताक्षर किए

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केरल के राज्यपाल ने राज्य में मलयाली को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाने संबंधी विधेयक पर हस्ताक्षर किए

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  • Publish Date - March 4, 2026 / 08:41 PM IST,
    Updated On - March 4, 2026 / 08:41 PM IST

तिरुवनंतपुरम, चार मार्च (भाषा) केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने बुधवार को मलयाली भाषा विधेयक 2025 पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसके तहत मलयाली को राज्य में प्रशासन की एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाया गया है। लोक भवन के सूत्रों ने यह जानकारी दी।

पिछले वर्ष अक्टूबर में केरल विधानसभा से पारित इस विधेयक का कर्नाटक सरकार ने विरोध किया था। कर्नाटक सरकार ने यह आशंका जताई थी कि इससे दोनों राज्यों के सीमा क्षेत्र में रहने वाले भाषाई अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को अनिवार्य रूप से मलयाली सीखने के लिए बाध्य किया जाएगा।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया था कि विधेयक में एक खंड शामिल है, जिसके तहत भाषाई अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से कन्नड़ और तमिल बोलने वाले लोगों के अधिकारों की सुरक्षा होगी।

उन्होंने कहा था, ‘मुख्य प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी भाषा जबरन लागू नहीं की जाएगी और भाषाई स्वतंत्रता पूरी तरह से संरक्षित रहेगी। अधिसूचित क्षेत्रों में, तमिल और कन्नड़ बोलने वाले लोग सचिवालय, विभागाध्यक्षों और स्थानीय कार्यालयों के साथ आधिकारिक पत्राचार में अपनी मातृभाषा का उपयोग जारी रख सकते हैं, और उनके जवाब भी उन्हीं भाषाओं में दिए जाएंगे।’

केरल के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि वे छात्र, जिनकी मातृभाषा मलयाली नहीं है, वे राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार स्कूलों में उपलब्ध भाषाओं में से किसी भी भाषा को चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे।

विधेयक के अनुसार, केरल के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 10वीं कक्षा तक मलयाली को अनिवार्य भाषा के रूप में लागू किया गया है।

इस विधेयक के तहत राज्य के सभी स्कूलों में मलयाली भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कदम उठाना अनिवार्य है।

विधेयक में यह भी कहा गया है कि केरल में पढ़ाई करने वाले अन्य राज्यों और विदेश से आए ऐसे छात्र, जिनकी मातृभाषा मलयाली नहीं है, उन्हें 9वीं और 10वीं कक्षा और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर मलयाली भाषा में परीक्षा देने से छूट दी जाएगी।

भाषा जोहेब सुभाष

सुभाष