अगर राजस्व घाटा अनुदान नहीं मिलेगा तो पानी पर रॉयल्टी दिया जाए: सुक्खू

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अगर राजस्व घाटा अनुदान नहीं मिलेगा तो पानी पर रॉयल्टी दिया जाए: सुक्खू

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  • Publish Date - March 4, 2026 / 08:20 PM IST,
    Updated On - March 4, 2026 / 08:20 PM IST

शिमला, चार मार्च (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य में पनबिजली संयंत्रों द्वारा उपयोग किए जाने वाले पानी पर 50 प्रतिशत रॉयल्टी दे, ताकि राजस्व घाटा अनुदान के अभाव में यह (राज्य) आत्मनिर्भर बन सके।

केंद्र ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश सहित कुछ राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद करने की घोषणा की थी। आरडीजी केंद्र द्वारा राज्यों को उनके राजस्व खातों में अंतर को पाटने के लिए जारी की गई धनराशि होती है।

सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कहा है कि ‘‘अगर केंद्र सरकार राज्य की संपत्ति (पानी) पर 50 प्रतिशत रॉयल्टी देने को तैयार है तो हमें आरडीजी की आवश्यकता नहीं होगी’।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन, नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन और सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) जैसे सार्वजनिक उपक्रम मिनी नवरत्न कंपनियां बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष एसजेवीएनएल का बजट 67,000 करोड़ रुपये था, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार का बजट 58,000 करोड़ रुपये था।

सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को इन जलविद्युत परियोजनाओं द्वारा अर्जित लाभ का कम से कम आधा हिस्सा दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे राज्य के पानी का उपयोग मुफ्त में करते हैं; लेकिन इसके बदले यदि धनराशि दी जाती है तो यह राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश के लोगों का अधिकार है।

सुक्खू ने कहा, ‘हम एक सहकारी संघीय ढांचे में रहते हैं, हमें अपनी बात रखने का अधिकार है।’

उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाजपा हिमाचल-विरोधी है।’

भाषा हक हक सुरेश

सुरेश