कोच्चि, 27 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) की सतर्कता शाखा को कोट्टायम के एट्टुमानूर महादेव मंदिर की पवित्र कलाकृति ‘एझारापोन्नाना’ में इस्तेमाल किए गए सोने की गुणवत्ता की जांच करने का निर्देश दिया है। ‘एझारापोन्नाना’ सोने की आठ हाथी प्रतिमाओं का समूह है।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और इस पर 23 जून को विचार करते हुए टीडीबी के मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी को जांच कर अदालत में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
‘एझारापोन्नाना’ में सोने से बनी हाथी की सात बड़ी और एक छोटी प्रतिमा शामिल हैं। इन्हें केवल मंदिर के वार्षिक उत्सव की शोभायात्रा के दौरान बाहर निकाला जाता है।
ए. जी. प्रसाद कुमार नाम के एक श्रद्धालु ने टीडीबी के समक्ष शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि ‘एझारापोन्नाना’ की सोने की परतों की मरम्मत और उनका नवीनीकरण हाल में किया गया था तथा इस दौरान सोने की मूल परतों को हटाकर उनकी जगह तांबे या कम मूल्य वाली अन्य धातुओं की परतें लगा दी गईं।
इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया और टीडीबी से रिपोर्ट मांगी।
टीडीबी ने अदालत में दाखिल हलफनामे में प्रशासनिक अधिकारी और सहायक देवस्वओम आयुक्त की रिपोर्ट संलग्न की।
रिपोर्ट में कहा गया कि सभी संबंधित रजिस्टर की जांच और मिलान किया गया तथा पूछताछ में ‘एझारापोन्नाना’ की मरम्मत या उसके रखरखाव का कोई रिकॉर्ड अथवा किसी तरह की हेराफेरी सामने नहीं आई।
अदालत ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी और सहायक देवस्वओम आयुक्त के निष्कर्षों पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है लेकिन टीडीबी की सतर्कता शाखा से स्वतंत्र जांच कराना जरूरी है।
अदालत ने मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी को मंदिर के रजिस्टर और ‘एझारापोन्नाना’ की जांच करने तथा आरोपों पर अपने निष्कर्षों सहित रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, ‘‘जांच के दौरान मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी किसी सुनार की सेवाएं भी लें, ताकि सोने के वजन, गुणवत्ता और असलियत की विधिवत जांच की जा सके।’’
मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
भाषा सिम्मी शोभना
शोभना