पलक्कड़, 19 सितंबर (भाषा) मिलमा के चेयरमैन के. एस. मणि ने शनिवार को आरोप लगाया कि मालाबार क्षेत्रीय सहकारी दूध उत्पादक संघ (एमआरसीएमपीयू) को भंग करने का केरलम सरकार का फैसला राजनीति से प्रेरित है और एमआरसीएमपीयू इस आदेश को अदालत में चुनौती देगा।
हालांकि, पशुपालन मंत्री बिंदु कृष्णा ने इस कदम के पीछे किसी भी राजनीतिक मकसद से इनकार किया।
डेरी विकास निदेशक ने शुक्रवार को केरल सहकारी दूध विपणन महासंघ (मिलमा) के तहत एक क्षेत्रीय संघ एमआरसीएमपीयू को भंग करने का आदेश जारी किया, जिसके बाद वायनाड में डेरी विकास के उप निदेशक ने इसके प्रशासक के रूप में कार्यभार संभाल लिया।
मणि ने कहा कि सरकार ने इस कार्रवाई के लिए चार मुख्य कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल सहकारी समिति अधिनियम की धारा 32 के तहत अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, “नैसर्गिक न्याय हमारे संविधान द्वारा दिया गया एक अधिकार है। किसी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पहले उनकी आपत्तियां दर्ज की जानी चाहिए। इस मामले में उस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।”
उन्होंने कहा कि संघ ने अधिकारियों द्वारा दिए गए जांच के आदेशों में सहयोग किया था और भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया था।
मणि ने कहा, “मिलमा और मालाबार क्षेत्रीय संघ के अध्यक्ष के रूप में, मैंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि यदि कोई यह साबित कर दे कि मैंने या शासी निकाय ने एक रुपये का भी भ्रष्टाचार किया है, तो मैं अगले ही दिन इस्तीफा दे दूंगा।”
मालाबार ग्रामीण विकास प्रतिष्ठान से जुड़े आरोपों पर मणि ने कहा कि यह एक स्वतंत्र सहकारी संस्था है, जो लगभग 25 वर्षों से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि हर साल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा इसके खातों का ‘ऑडिट’ किया जाता है।
मलप्पुरम डेरी से लगभग 85 लाख रुपये मूल्य का घी चोरी होने के आरोप के संबंध में, मणि ने कहा कि यह गड़बड़ी मिलमा अधिकारियों द्वारा स्टॉक सत्यापन के दौरान पकड़ी गई थी और इसके बाद पुलिस में मामला दर्ज किया गया था।
पशुपालन मंत्री बिंदु कृष्णा ने कहा कि एमआरसीएमपीयू को कई अनियमितताओं और बढ़ती शिकायतों के कारण भंग किया गया।
उन्होंने कहा, “कई अनियमितताएं सामने आईं, जैसे दूध की खरीद में लाखों रुपये का भ्रष्टाचार, कम गुणवत्ता वाले दूध की खरीद और विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ी धांधलियां। इन प्रथम दृष्टया निष्कर्षों के आधार पर इसे भंग करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद विस्तृत विभागीय जांच होगी।”
उन्होंने इस कदम के पीछे किसी भी राजनीतिक मकसद से इनकार किया।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक मंशा के बहाने भ्रष्टाचार को छिपाना केरल में काम नहीं करेगा। राजनीतिक कारणों से कुछ भी नहीं किया जा रहा। डेरी विकास विभाग का एकमात्र उद्देश्य मिलमा का अस्तित्व और सुचारू संचालन है।”
कृष्णा ने कहा कि विभाग स्तर पर भी जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा, “विभाग की अपनी प्रक्रियाएं हैं, और चीजें उन कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार आगे बढ़ेंगी।”
भाषा जोहेब माधव
माधव