केरलम : मंत्री रोजी ने महिलाओं को घर तक सीमित करने के विचार की आलोचना की
केरलम : मंत्री रोजी ने महिलाओं को घर तक सीमित करने के विचार की आलोचना की
तिरुवनंतपुरम, 31 अगस्त (भाषा) केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने सोमवार को एक फेसबुक पोस्ट में महिलाओं को घरों तक सीमित रखने के विचार की आलोचना की और अपने विचार का समापन ‘पितृसत्ता को खत्म करो’ के नारे के साथ किया।
रोजी ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह पोस्ट इस्लामिक विद्वान कांतापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार के उस बयान के एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने कोच्चि में एक इस्लामिक सम्मेलन में कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘भारी तबाही’ होगी और इस्लाम में इससे बचने के लिए महिलाओं के लिए पर्दा करने का नियम है।
कांतापुरम ने कहा था, ‘‘महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से भारी नुकसान को समझते हुए, इस्लाम ने उनके लिए पर्दा अनिवार्य किया है। पवित्र कुरान में कहा गया है कि महिलाओं को अपने घरों के भीतर ही रहना चाहिए और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए।’’
रोजी की फेसबुक पोस्ट उनके पार्टी नेता राहुल गांधी के उस बयान के दो दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने ‘मनुस्मृति वाली सोच’ की कड़ी आलोचना की थी और छात्राओं से ‘पितृसत्ता को समाप्त करने’ का आह्वान किया था। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा था, जिन्होंने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान लड़कियों द्वारा अपशब्दों का इस्तेमाल किए जाने पर हैरानी जताई थी।
रोजी ने कातांपुर का नाम लिये बिना कहा कि महिलाएं रातों-रात घरों से निकलकर सार्वजनिक जीवन में नहीं आईं, बल्कि सदियों के संघर्ष और त्याग के बाद मुख्यधारा में शामिल हुईं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 21वीं सदी में भी महिलाओं को मंच से वापस रसोई में भेजने की पिछड़ी सोच को दोहराया जा रहा है।’’
केरलम में महिलाओं के अधिकारों के लिए किए गए संघर्षों को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य का महिलाओं पर लगाई गई सामाजिक पाबंदियों के खिलाफ संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह वह जमीन है जहां शरीर के ऊपरी हिस्से को ढंकने के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी गई थी।’’
इस बीच,केरलम के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने कन्नूर में इस्लामिक मामलों के विद्वान की टिप्पणी पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘ सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी का विरोध करने से सहमत नहीं हूं।’’
केरलम के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है और किसी को भी, चाहे वह कोई भी हो, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
भाषा धीरज माधव
माधव

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