केरल : पार्श्व गायिका एस. जानकी के निधन पर जनप्रतिनिधियों और फिल्मी हस्तियों ने जताया शोक
केरल : पार्श्व गायिका एस. जानकी के निधन पर जनप्रतिनिधियों और फिल्मी हस्तियों ने जताया शोक
(फोटो के साथ)
तिरुवनंतपुरम, 12 जुलाई (भाषा) महान पार्श्व गायिका एस. जानकी के निधन पर रविवार को केरल में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने शोक जताया। फिल्म जगत की हस्तियों, संगीतकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा भारतीय फिल्म संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।
जानकी का शनिवार को मैसुरु के एक निजी अस्पताल में वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 88 वर्ष की थीं।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार शुक्रवार रात सांस लेने में तकलीफ होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार को उनका निधन हो गया।
पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने कहा कि जानकी का निधन भारतीय सिनेमा और संगीत के एक गौरवशाली युग के अंत का प्रतीक है।
विजयन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘वह भले ही किसी दूसरे राज्य से थीं, लेकिन उनकी आवाज हर मलयाली के दिल में बसती थी। उन्होंने अपने हर गीत के जरिये हमारी गहरी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी और हमारी यादों एवं जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गईं।’’
विजयन ने कहा कि जानकी का संगीत आने वाली पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा और उनकी असाधारण विरासत सदैव जीवित रहेगी।
अभिनेता मोहनलाल ने फेसबुक पर एक पोस्ट में जानकी को ‘‘भारत की बुलबुल’’ बताते हुए कहा कि मलयालम, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में उनके भावपूर्ण गीतों ने एक पूरे युग को परिभाषित किया।
उन्होंने कहा कि जानकी ने उनकी पहली फिल्म ‘मंजिल विरिंजा पूक्कल’ के गीत गाए थे और इसके लिए वह जीवनभर उनके ऋणी रहेंगे।
मोहनलाल ने कहा कि गायिका ने अपनी जादुई आवाज से खुशी, दुख और मासूमियत सहित हर मानवीय भावना को स्वर दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि जानकी द्वारा गाए गए अनेक गीतों में उन पर फिल्मांकन हुआ।
अभिनेता ने जानकी को शांत, स्नेहिल और सभी के साथ समान व्यवहार करने वाला व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनके साथ उनका घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध था। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
अभिनेता ममूटी ने सोशल मीडिया पर जानकी का एक चित्र साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अभिनेत्री मंजू वारियर ने भी फेसबुक पर उनकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘‘कला अमर रहती है।’’
पार्श्व गायक जी. वेणुगोपाल ने कहा कि संगीत के स्वर्णिम दौर में जानकी द्वारा गाए गए मधुर गीत हमेशा जीवित रहेंगे।
पार्श्व गायक एम. जी. श्रीकुमार ने जानकी की गायन शैली को ‘‘संगीत के हर विद्यार्थी के लिए एक पाठ्यपुस्तक’’ बताया।
संगीतकार एम. जयचंद्रन ने कहा कि जानकी पवित्रता, विनम्रता, प्रेम और समर्पण की प्रतिमूर्ति थीं।
अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए चर्चित जानकी ने 20 से अधिक भाषाओं में 48,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। इनमें कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं के गीत प्रमुख हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने महान पार्श्व गायिका एस. जानकी के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि जानकी को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी और उनकी विरासत को चिरस्थायी बनाने के उपाय किए जाएंगे। उन्होंने जानकी को भारत की महानतम संगीत विभूतियों में से एक बताया।
शिवकुमार ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार ने मैसूरु में अंतिम संस्कार से पहले आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए व्यवस्था की है और उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि वह फिल्म जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जानकी की विरासत को सहेजने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भारत की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों में से एक, ‘गान कोगिले’ (गीतों की कोयल) के नाम से विख्यात महान पार्श्व गायिका जानकी अब हमारे बीच नहीं रहीं। उन्होंने लगभग 50 वर्षों तक सभी भाषाओं के फिल्म उद्योग जगत की सेवा की।’’
शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने शनिवार को जानकी के परिवार से बातचीत की थी और यदि परिवार चाहता तो उनके पार्थिव शरीर को चेन्नई या हैदराबाद ले जाने की व्यवस्था कराने की पेशकश की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने परिवार से कहा था कि यदि आप उन्हें चेन्नई ले जाना चाहते हैं तो मैं व्यवस्था कर दूंगा। यदि हैदराबाद ले जाना चाहते हैं तो उन्हें विमान से वहां पहुंचा दिया जाएगा। लेकिन परिवार ने कहा कि हमारी अम्मा (दादी) की अंतिम इच्छा मैसुरु में ही रहने की थी। इसलिए उन्हें यहीं लाया गया।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने रविवार अपराह्न तक मैसुरु में आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की है।
उन्होंने बताया कि मंत्री यतींद्र सिद्धरमैया को अपना निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर राज्य सरकार की ओर से अंतिम संस्कार में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।
भारतीय संगीत में जानकी के योगदान को याद करते हुए शिवकुमार ने कहा कि उन्हें चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 33 राज्य स्तरीय पुरस्कार और कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने कर्नाटक के प्रति जानकी के विशेष लगाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी भाषा, हमारी धरती और मैसुरु के प्रति उनका प्रेम अंतिम सांस तक बना रहा। इससे हम सभी गौरवान्वित हैं। यह भी एक विशेष संयोग है कि उन्होंने अपना पहला और अंतिम गीत दोनों मैसूरु में ही गाया।’’
शिवकुमार ने कहा कि सरकार फिल्म जगत के लोगों से विचार-विमर्श कर ऐसे कदम उठाएगी, जिससे जानकी की स्मृति सदैव अमर बनी रहे।
उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले दिनों में मैं फिल्म उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करूंगा और यह तय किया जाएगा कि उनके नाम को अमर बनाए रखने के लिए और क्या किया जा सकता है।’’
‘दक्षिण भारत की बुलबुल’ के नाम से विख्यात जानकी ने लगभग छह दशक लंबे अपने करियर में कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी सहित करीब 20 भारतीय भाषाओं में 48,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में 1938 में जन्मी जानकी ने वर्ष 1957 में तमिल फिल्म ‘विधियिन विलायट्टु’ से पार्श्व गायन की शुरुआत की थी।
कर्नाटक में उन्हें विशेष लोकप्रियता हासिल की थी, जहां प्रशंसक उन्हें स्नेहपूर्वक ‘गान कोगिले’ कहकर पुकारते थे। पी. बी. श्रीनिवास, एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम और राजकुमार के साथ उनके युगल गीत आज भी बेहद लोकप्रिय हैं।
वर्ष 2013 में उन्होंने यह कहते हुए पद्म भूषण सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि यह सम्मान उन्हें बहुत देर से दिया जा रहा है।
मैसुरु में उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। महान गायिका के अंतिम संस्कार की तैयारियां मैसुरु के कनियानहुंडी में की जा रही हैं, जिसकी निगरानी जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी कर रहे हैं।
इस बीच, रविवार को केरल सरकार के सूत्रों ने बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन जानकी के अंतिम संस्कार में केरल सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
भाषा रवि कांत सुरेश
सुरेश

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