धर्मनिरपेक्षता की रक्षा में केरल को भारत का नेतृत्व करना चाहिए : अमर्त्य सेन

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धर्मनिरपेक्षता की रक्षा में केरल को भारत का नेतृत्व करना चाहिए : अमर्त्य सेन

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 12:46 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 12:46 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 16 फरवरी (भाषा) अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा है कि केरल ने मानव विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है और उसे भारत में धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने में भी निर्णायक योगदान देना चाहिए।

सेन ने केरल सरकार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘‘विजन 2031’’ सम्मेलन को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए रविवार को यह बात कही।

सेन ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ वह अक्सर खुद से पूछते हैं कि क्या वह उन विचारों पर अब भी कायम हैं जिन पर वह युवावस्था में दृढ़ विश्वास रखते थे।

सेन ने कहा, ‘‘ सब के लिए मैं ऐसा नहीं कह सकता। उदाहरण के लिए, मुझे यह स्वीकार करना होगा कि भारत में धर्मनिरपेक्षता की अभेद्यता में मेरा विश्वास कमजोर हुआ है। धर्मनिरपेक्षता का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या हम इस देश पर थोपी जा रही संकीर्णता के सुनियोजित और आक्रामक प्रयासों का प्रतिरोध कर पाते हैं या नहीं।’’

उन्होंने यह भी कहा कि उनके कुछ शुरुआती विश्वास आज भी उतने ही दृढ़ हैं जितने पहले थे।

उन्होंने कहा, ‘संयोगवश, इनमें से कुछ विचार सामान्य रूप से केरल के इतिहास और विशेष रूप से एक स्वतंत्र केरल के उदय से संबंधित हैं, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सहयोग के माध्यम से मानवीय क्षमताओं को सशक्त बनाकर हासिल की गई इसकी आश्चर्यजनक आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियों से भी संबंधित हैं।’

राज्य के इतिहास का जिक्र करते हुए सेन ने कहा कि यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि केरल की तुलना 14वीं शताब्दी में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जाने लगी थी, यहां तक ​​कि सुदूर अफ्रीका में भी। उन्होंने बताया कि यात्री इब्न बतूता ने वर्तमान घाना और माली के बीच स्थित वलाटा नामक देश का दौरा किया था।

सेन ने कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि वहां महिलाओं की स्वतंत्रता को स्थानीय स्तर पर महत्व दिया जाता है, जिसमें उनकी सकारात्मक सामाजिक भूमिका और अधिकार भी शामिल हैं।

सेन ने कहा कि बतूता ने गौर किया कि मातृवंशीय विरासत सहित इसी तरह के महिला अधिकार उनकी व्यापक यात्राओं के दौरान केवल एक अन्य स्थान पर देखने को मिले, और वह स्थान भारत में केरल था।

उन्होंने कहा, ‘‘आधुनिक काल में केरल की आश्चर्यजनक आर्थिक और सामाजिक प्रगति में महिलाओं की भूमिका के बारे में जो कुछ भी लिखा गया है, उसकी एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी है।’’

सेन ने कहा कि केरल की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि विश्व के प्रति उसका खुलापन था। उनके अनुसार, इन दिनों भारतीय बौद्धिक महानता और सनातन विरासत के बारे में बहुत दुष्प्रचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत के प्रवेशद्वार के रूप में केरल की भूमिका न केवल पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण रही है, बल्कि इसने राज्य को खुले विचारों वाला और प्रयोगधर्मी स्थान बनाए रखने में भी अहम योगदान दिया है।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा