संसद में बोलने से ‘बचते हैं’ मोदी, साक्षात्कार ‘खोखले शब्दों’ के अलावा कुछ नहीं : डेरेक ओ’ब्रायन

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संसद में बोलने से ‘बचते हैं’ मोदी, साक्षात्कार ‘खोखले शब्दों’ के अलावा कुछ नहीं : डेरेक ओ'ब्रायन

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 02:11 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 02:11 PM IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार को सोमवार को ‘‘खोखले शब्द’’ करार दिया और कहा कि वह संसद में बोलने के बजाय ‘‘भाग गए’’।

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता ओ’ब्रायन ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘‘टेलीप्रॉम्प्टर टाइकून’’ भी कहा।

ओ’ब्रायन ने साक्षात्कार पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी यानी ‘टेलीप्रॉम्प्टर टाइकून’ के खोखले शब्दों का एक और उदाहरण…, जो संसद में बोलने से कतराते हैं।’’

हाल में बजट सत्र के दौरान एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में, विपक्षी सदस्यों की लगातार नारेबाजी के बीच, लोकसभा ने प्रधानमंत्री के पारंपरिक उत्तर के बिना ही, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव को पारित कर दिया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बाद में कहा कि उनके पास ‘‘पुख्ता जानकारी’’ थी कि कांग्रेस के कई सदस्य प्रधानमंत्री मोदी की सीट की ओर बढ़ सकते हैं और ‘‘किसी अप्रत्याशित घटना’’ को अंजाम दे सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने उनसे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने के लिए सदन में न आने का अनुरोध किया था।

राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के बाद मोदी ने जवाब दिया था। इस दौरान विपक्षी दलों ने सदन से बहिर्गमन किया था।

प्रधानमंत्री ने रविवार को नवीनतम बजट और अपनी सरकार द्वारा हस्ताक्षरित कई वैश्विक व्यापार समझौतों को विकसित भारत की नींव बताया और निजी क्षेत्र से अब ‘‘अधिक आक्रामक’’ और ‘‘साहसिक’’ रूप से आगे आने का आग्रह किया।

पीटीआई को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में, मोदी ने महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों को हासिल करने में विफल रहने के लिए पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की कड़ी आलोचना की और जोर देकर कहा कि विकसित भारत में महिलाएं ‘‘सबसे महत्वपूर्ण भूमिका’’ निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिरता और बेहतर पूर्वानुमानों ने भारत में निवेशकों का विश्वास बहाल किया है तथा मजबूत विनिर्माण, सेवा और लघु एवं मध्यम उद्यमों ने भारत को ‘‘मजबूत स्थिति’’ से 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने में सक्षम बनाया है।

भाषा

नेत्रपाल मनीषा

मनीषा