पानी के अधिकारों की रक्षा के मामले में केरल को तमिलनाडु से सीख लेनी चाहिए: कृष्णनकुट्टी

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पानी के अधिकारों की रक्षा के मामले में केरल को तमिलनाडु से सीख लेनी चाहिए: कृष्णनकुट्टी

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  • Publish Date - August 2, 2026 / 07:37 PM IST,
    Updated On - August 2, 2026 / 07:37 PM IST

पलक्कड़, दो अगस्त (भाषा) वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) नेता के. कृष्णनकुट्टी ने रविवार को केरल सरकार से आग्रह किया कि वह तमिलनाडु के साथ लंबित जल बंटवारे के मुद्दों को उठाए और कर्नाटक से कावेरी का पानी हासिल करने के तमिलनाडु के तरीके से सीख ले।

कृष्णनकुट्टी, एलडीएफ के घटक दल इंडियन सोशलिस्ट जनता दल के वरिष्ठ नेता हैं।

वह 2018 से 2021 तक केरल के जल संसाधन मंत्री और 2021 से 2026 तक ऊर्जा मंत्री रहे थे।

कृष्णनकुट्टी ने केरल सरकार की ओर से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को मादक पदार्थ रोधी अभियान ‘ऑपरेशन तूफान’ में आमंत्रित किए जाने का जिक्र करते हुए ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा कि इस मौके का उपयोग केरल के लंबित जल बंटवारे के मुद्दों पर चर्चा करने और यह समझने के लिए भी किया जाना चाहिए कि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु ने अपने जल अधिकारों को प्रभावी ढंग से कैसे सुरक्षित किया।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने लगातार दबाव बनाया और कर्नाटक से कावेरी नदी के पानी में अपना निर्धारित हिस्सा हासिल करने में सफलता पाई।

वरिष्ठ नेता ने कहा, “केरल को इससे सीख लेनी चाहिए। कावेरी के जलाशयों में जल भंडारण 50 प्रतिशत से कम होने के बावजूद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की मंजूरी दे दी। तमिलनाडु अपना वाजिब हिस्सा हासिल करने में सफल रहा, या यूं कहें कि वह आवश्यक दबाव बनाने में कामयाब रहा।”

कृष्णनकुट्टी ने आरोप लगाया कि परंबिकुलम-अलियार समझौते के तहत मिलने वाले पानी को हासिल करने के लिए केरल ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।

उन्होंने आरोप लगाया, “परंबिकुलम-अलियार समझौते के तहत केरल ने अपने हिस्से का पानी पाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। इसके बजाय उसने तमिलनाडु के उन तर्कों को स्वीकार कर लिया, जिन्हें मैं गलत मानता हूं, और चित्तूर के किसानों के हितों से समझौता कर लिया।”

कृष्णनकुट्टी ने दावा किया कि एक ओर तमिलनाडु, कर्नाटक से कावेरी नदी के पानी में अपना हिस्सा हासिल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह कावेरी नदी घाटी में परंबिकुलम-अलियार परियोजना के तहत उपलब्ध पानी का भी रणनीतिक ढंग से उपयोग कर रहा है, जिससे केरल के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

भाषा जितेंद्र धीरज

धीरज