Keralam Exit Poll Results 2026: केरलम के एग्जिट पोल में चौंकाने वाला परिणाम! लेफ्ट का एकलौता गढ़ हुआ धराशायी, कांग्रेस की इस गठबंधन को मिलने जा रही इतनी सीटें

केरलम के एग्जिट पोल में चौंकाने वाला परिणाम! लेफ्ट का एकलौता गढ़ हुआ धराशायी, Keralam Exit Poll Results 2026:

Keralam Exit Poll Results 2026: केरलम के एग्जिट पोल में चौंकाने वाला परिणाम! लेफ्ट का एकलौता गढ़ हुआ धराशायी, कांग्रेस की इस गठबंधन को मिलने जा रही इतनी सीटें

Raipur Congress News:

Modified Date: April 29, 2026 / 07:35 pm IST
Published Date: April 29, 2026 7:26 pm IST

नई दिल्लीः Keralam Exit Poll Results 2026 देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए अब मतदान का दौर खत्म हो चुका है। इसी के साथ ही अब एग्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। भारत में केरलम ही लेफ्ट का एकलौता गढ़ बचा हुआ था, जो दस साल बाद ढहता हुआ नजर आ रहा। एग्जिट पोल के मुताबिक पिनराई विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ को तगड़ा झटका लगा है तो कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ की दस साल बाद सत्ता में वापसी होती दिख रही है।

यहां देखें एक्जिट पोल

एजेंसी एलडीएफ यूडीएफ भाजपा+ अन्य
मैट्रिज 60–65 70–75 3–5 2–4
पीपल्स पल्स 75–85 55–65 0–3 0
जेवीसी 52–61 72–84 3–7 0
एक्सिस माय इंडिया 49–62 78–90 0–3 0
वोट वाइब 58–68 70–80 0 0–4
पी-मारक्यू 62–69 71–79 1–4 0

केरल की हार से ‘लेफ्ट मुक्त भारत’

Keralam Exit Poll Results 2026 एग्जिट पोल के अनुमान अगर 4 मई को नतीजे में बदलते हैं तो केरलम की सत्ता से लेफ्ट की विदाई सिर्फ एक हार नहीं बल्कि सियासी तौर पर बड़ा झटका होगा। 73 साल में पहली बार ऐसा होगा जब भारत के किसी भी राज्य में वाम मोर्चे की सरकार नहीं होगी। संयोग देखिए कि देश को ‘लेफ्ट मुक्त’ करने का काम कांग्रेस ने करके दिखाया है, जो बरसों तक और केंद्र में लेफ्ट के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलती रही है। आजादी के बाद लेफ्ट ने सबसे पहले केरल में 1957 में सरकार बनाई थी, उसके 1977 में बंगाल और फिर त्रिपुरा में लेफ्ट की सरकार बनी। लेफ्ट 2011 में बंगाल की सत्ता से बाहर हुआ और उसके बाद 2018 में त्रिपुरा में लेफ्ट बाहर हुई थी।

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।