अपहरण मामले का दोषी 26 साल बाद देहरादून से गिरफ्तार

अपहरण मामले का दोषी 26 साल बाद देहरादून से गिरफ्तार

अपहरण मामले का दोषी 26 साल बाद देहरादून से गिरफ्तार
Modified Date: August 17, 2026 / 06:04 pm IST
Published Date: August 17, 2026 6:04 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली पुलिस ने अपहरण के मामले में अंतरिम जमानत मिलने के बाद 26 साल पहले फरार हुए दोषी को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया है। वह अपनी पहचान बदलकर देहरादून में बिल्डर बन गया था। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उसने एक व्यक्ति का अपहरण कर एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की थी और इस मामले में उसे उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई थी।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में सैदपुर के मूल निवासी अमित यादव को अपराध शाखा की टीम ने 13 अगस्त की रात को गिरफ्तार किया।

पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि यादव को 1999 में मामले में दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन जनवरी 2000 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे एक महीने की अंतरिम जमानत दे दी थी।

उन्होंने कहा कि जमानत अवधि के बाद उसने आत्मसमर्पण नहीं किया और 26 वर्षों तक फरार रहा।

पुलिस ने बताया कि वर्ष 2000 में ही उसकी गिरफ्तारी पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था और उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था।

मामला सितंबर 1995 में ऋषि सेठी नामक व्यक्ति के अपहरण से संबंधित है। सेठी को 12 सितंबर 1995 को तीन से चार लोगों ने अगवा कर लिया था।

अपहरणकर्ताओं ने सेठी के परिवार से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी और उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक होटल के कमरे में 10 लाख रुपये रखे गए थे।

पुलिस ने बताया कि 16 सितंबर 1995 को फिरौती की रकम इकट्ठा करने के बाद यादव को मेरठ में पुलिस ने पकड़ लिया था। उसके कब्जे से 10 लाख रुपये बरामद कर लिए गए थे और उसकी निशानदेही पर पीड़ित को भी गाजियाबाद से मुक्त करा लिया गया था।

अपराध शाखा ने जघन्य अपराधों में शामिल भगोड़ों का पता लगाने के लिए एक समर्पित अभियान चलाया। एक टीम को फरार दोषी के बारे में जानकारी मिली और उसने उसके ठिकाने के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर दिया।

अधिकारी ने कहा, ‘टीम के सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों में से एक तीन दशक से अधिक पुराने मामले में भगोड़े की पहचान स्थापित करना था। यादव की कोई तस्वीर जेल अधिकारियों या दिल्ली पुलिस के पास उपलब्ध नहीं थी। यहां तक कि प्रासंगिक मामले के दस्तावेजों और रिकॉर्ड का भी शुरू में पता नहीं लगाया जा सका, जिससे टीम को अपराध रिकॉर्ड कार्यालय और अपराध शाखा के ‘फिंगर प्रिंट ब्यूरो’ से सहायता लेनी पड़ी।’

टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी से पता चला कि यादव देहरादून में रह रहा है।

अधिकारी ने बताया कि इसके बाद एक टीम ने 13 अगस्त को देहरादून में छापेमारी की और यादव को पकड़ लिया।

पूछताछ के दौरान, यादव ने खुलासा किया कि वर्ष 2000 में फरार होने के बाद, उसने गाजियाबाद में अपना किराए का आवास खाली कर दिया और अपने किसी भी परिचित के संपर्क में नहीं रहा।

अधिकारी के मुताबिक, उसने सैदपुर में अपनी पैतृक संपत्ति भी बेच दी और ऋषिकेश चला गया, जहां उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार अपने ठिकाने बदले।

अधिकारी ने कहा, ‘2001 में, वह देहरादून चला गया, जहां उसने अपनी पहचान बदल ली और एक नया जीवन शुरू किया। बाद में वह निर्माण व्यवसाय में शामिल हो गया और शहर में बिल्डर बन गया।’

गिरफ्तारी के बाद यादव को तिहाड़ जेल में रखा गया है।

भाषा नोमान दिलीप

दिलीप


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