कोलकाता के स्कूल को इस्लामी शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने का अनुरोध करने वाला पत्र मिला

Ads

कोलकाता के स्कूल को इस्लामी शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने का अनुरोध करने वाला पत्र मिला

  •  
  • Publish Date - September 28, 2026 / 03:37 PM IST,
    Updated On - September 28, 2026 / 03:37 PM IST

कोलकाता, 28 सितंबर (भाषा) कोलकाता के एक सरकारी स्कूल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उसे पंजीकृत डाक से एक ऐसा पार्सल मिला है, जिसमें पवित्र कुरान की एक प्रति सहित इस्लाम से जुड़े धार्मिक ग्रंथों के अलावा पाठ्यक्रम में इस्लामी शिक्षा को शामिल करने का सुझाव देने वाला पत्र मौजूद है।

यादवपुर विद्यापीठ के प्रधानाचार्य पार्थप्रतिम बैद्य ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि 24 सितंबर को उनकी मेज पर कुछ पार्सल आए, जिनमें एक में कुरान की एक प्रति और एक पत्र शामिल था, जिसमें स्कूल से अपने पाठ्यक्रम में इस्लामी शिक्षा और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन को शामिल करने का अनुरोध किया गया था।

उन्होंने बताया कि मामले के सिलसिले में यादवपुर पुलिस थाने में 25 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

बैद्य ने संबंधित पार्सल भेजने वाले व्यक्ति का नाम बताए बगैर कहा, “हम एक प्रतिष्ठित सरकारी स्कूल हैं और हमने कभी भी अपने छात्रों के मन में धर्म से जुड़ी कट्टरपंथी सोच नहीं डाली है। हम भारत की समावेशी सोच में विश्वास करते हैं, जहां छात्रों को किसी खास धर्म के सिद्धांत नहीं सिखाए जा सकते। मौजूदा हालात को देखते हुए, मुझे लगता है कि कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के मकसद से यह पत्र और पार्सल भेजा होगा।”

उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाना पुलिस का काम है।

बैद्य ने कहा, “इस बात को ध्यान में रखते हुए कि हमारे स्कूल की इमारत यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर (जहां छात्रों के दो गुटों के बीच टकराव हो चुका है) के पास है, हम कोई परेशानी नहीं चाहते, क्योंकि यहां हजारों बच्चे पढ़ते हैं।”

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने पार्सल के स्रोत की जांच शुरू कर दी है और भेजने वाले की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।

अधिकारी के मुताबिक, जांचकर्ता स्कूल के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाल रहे हैं तथा यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पार्सल और पत्र में जिस व्यक्ति का नाम भेजने वाले के रूप में दर्ज है, क्या वास्तव में उसी ने इसे भेजा था या किसी और ने उसकी ओर से यह काम किया।

भाषा पारुल संतोष

संतोष

संतोष