लद्दाख आंदोलन : वांगचुक की रिहाई के दो दिन बाद लेह में रैली, करगिल में बंद

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लद्दाख आंदोलन : वांगचुक की रिहाई के दो दिन बाद लेह में रैली, करगिल में बंद

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 04:37 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 04:37 PM IST

लेह, 16 मार्च (भाषा) लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) द्वारा लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची लागू करने की मांग के समर्थन में किए गए आह्वान पर सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच लेह शहर में आयोजित रैली में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि करगिल में बंद रहा।

सितंबर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद से एलएबी द्वारा यह पहली बड़ी रैली थी। यह जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत लगभग छह महीने की हिरासत के बाद केंद्र द्वारा रिहा किए जाने के दो दिन बाद हुई है।

लद्दाख के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने लेह के सिंगे नामग्याल चौक स्थित रैली स्थल का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर भर में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे के नेतृत्व में, प्रदर्शनकारियों ने सिंगे नामग्याल चौक से शुरुआत की और लेह पोलो मैदान तक मार्च किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं सहित अन्य ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इसे छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांगों के समर्थन में नारे लगाए।

रैली में शामिल कुछ को उन चार लोगों की तस्वीरें लिये हुए भी देखा गया, जो पिछले साल सितंबर में एलएबी द्वारा प्रायोजित विरोध रैली के हिंसक होने के बाद हुई गोलीबारी में मारे गए थे।

राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के मुद्दों पर पिछले पांच वर्षों से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दो समूहों, एलएबी और केडीए के संयुक्त आह्वान के जवाब में करगिल और उससे सटे द्रास में पूर्ण बंद रहा। अधिकारियों ने बताया कि कहीं से भी कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

लेह में पत्रकारों से बातचीत में दोरजे ने प्रशासन द्वारा सड़कों पर बैरिकेड लगाने और प्रतिबंध लागू करने के बावजूद रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए लोगों का आभार व्यक्त किया।

एलएबी नेता ने रैली को ‘बड़ी सफलता’ बताते हुए कहा, ‘मैं लद्दाख के लोगों को कड़ी उकसावे वाली कार्रवाई के बावजूद पूरी तरह शांति बनाए रखने के लिए बधाई देना चाहता हूं।’

उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह दावा करने की कोशिश करते हैं कि एपेक्स बॉडी को जनता का समर्थन प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘आज लद्दाख की जनता ने यह साबित कर दिया है कि जनता एपेक्स बॉडी और केडीए के साथ खड़ी है।’’

आंदोलन के एक प्रमुख नेता वांगचुक को सितंबर में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था।

केंद्र ने शनिवार को घोषणा की कि वह ‘‘सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को सुगम बनाने’’ के लिए वांगचुक की हिरासत रद्द कर रहा है।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश