लद्दाख हिंसा : वांगचुक ने जांच रिपोर्ट जारी करने, पीड़ितों के लिए अधिक मुआवजे की मांग की
लद्दाख हिंसा : वांगचुक ने जांच रिपोर्ट जारी करने, पीड़ितों के लिए अधिक मुआवजे की मांग की
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा में चार लोगों की मौत और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत उन्हें हिरासत में लिए जाने की घटना के एक साल बाद रविवार को न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पीड़ितों को अधिक मुआवजा देने और सरकारी शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।
इस साल मार्च में रिहा किए गए वांगचुक ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. एस. चौहान की अध्यक्षता में हुई जांच में पिछले साल 24 सितंबर को लद्दाख में हुई पुलिस गोलीबारी के दौरान वास्तव में क्या हुआ, यह स्पष्ट होना चाहिए। इसमें यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या गोली चलाने का आदेश दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘इन सवालों का जवाब अफवाहों, आरोपों -प्रत्यारोपों से नहीं दिया जा सकता। इसी वजह से न्यायिक जांच गठित की गई थी।’’
अपनी हिरासत के एक साल बाद दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वांगचुक ने बताया कि पिछले साल 26 सितंबर को उन्हें विशेष विमान से जोधपुर ले जाया गया था और बाद में बताया गया कि उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया है तथा पूरी तरह अलग-थलग रखा जाएगा।
वांगचुक ने दावा किया कि उन्हें लगता है कि पिछले साल 24 सितंबर को एक मुठभेड़ में उन्हें मारने की साजिश थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी समझ के अनुसार, मुझे मुठभेड़ में मारने की साजिश थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।’’
वांगचुक ने कहा कि इसके बजाय उन्हें जेल की एक कोठरी में ‘‘पूरी तरह अलग-थलग’’ रखा गया।
लद्दाख हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों और गंभीर या स्थायी चोटों से प्रभावित लोगों के लिए अधिक मुआवजे की मांग करते हुए वांगचुक ने कहा कि मुआवजा किसी नुकसान को राज्य की ओर से स्वीकार किए जाने का भी प्रतीक होता है।
उन्होंने कहा कि लद्दाख प्रशासन ने चारों मृतकों के परिवारों को 15-15 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की, जबकि केंद्र शासित प्रदेश में एक के बाद एक आयोजित किए जा रहे उत्सवों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
वांगचुक ने कहा, ‘‘क्या 15 लाख रुपये कभी किसी मां को उसके बेटे, पत्नी को उसके पति या बच्चों को उनके पिता की मौत की भरपाई कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं। कोई भी रकम ऐसा नहीं कर सकती।’’
चौबीस सितंबर की घटनाओं से जुड़े आपराधिक मामलों की समीक्षा की मांग करते हुए वांगचुक ने कहा कि 87 लोगों को आरोपी के रूप में चिह्नित किया गया था और 81 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 20 लोगों के खिलाफ मामले वापस लेने की मंजूरी दी जा चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रशासन ने अब 20 लोगों के खिलाफ मामले वापस लेने की मंजूरी दे दी है। यह स्वागत योग्य कदम है। लेकिन बाकी लोगों का क्या? लद्दाख के लोगों का कहना है कि इन मामलों में फंसे लोगों में आम नागरिक भी शामिल थे, जो संयोग से वहां मौजूद थे, और ऐसे स्वयंसेवक भी थे जो स्थिति को शांत करने के लिए वहां गए थे। कुछ लोगों पर हत्या के प्रयास समेत बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं।’’
भाषा शफीक नरेश
नरेश

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