नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से जमीन के बदले नौकरी ‘घोटाले’ में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया है।
लालू प्रसाद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सीबीआई की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा के समक्ष अपनी दलीलें पूरी कीं।
प्रसाद ने अपनी याचिका में प्राथमिकी के साथ-साथ 2022, 2023 और 2024 में दायर तीन आरोपपत्रों और संज्ञान संबंधी आदेशों को भी रद्द करने का अनुरोध किया है।
राजद सुप्रीमो ने दलील दी है कि इस मामले में जांच, प्राथमिकी, छानबीन और उसके बाद दायर आरोपपत्र कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं हैं, क्योंकि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-17ए के तहत अनिवार्य पूर्व स्वीकृति नहीं ली।
सिब्बल ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि सीबीआई का कहना है कि लालू प्रसाद ने रेल मंत्री के रूप में अपनी “आधिकारिक” क्षमता में काम किया। उन्होंने कहा कि इसलिए प्रसाद पर “आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों के निर्वहन” के दौरान कथित रूप से किए गए कृत्यों के लिए मुकदमा चलाने के वास्ते मंजूरी की आवश्यकता है।
राजू ने सिब्बल की दलीलों का विरोध किया और कहा कि याचिकाकर्ता ने जिस तरह से दावा किया है, उस तरह से मंजूरी जरूरी नहीं थी।
राजू ने पहले दलील दी थी कि नियुक्तियों पर निर्णय लेने या सिफारिश करने का अधिकार महाप्रबंधकों के पास था और इसलिए लालू प्रसाद के खिलाफ कार्यवाही के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-17ए के तहत पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि उनके आचरण को “उनके आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों के निर्वहन” के दायरे में नहीं माना जा सकता है।
अदालत ने सीबीआई और लालू प्रसाद, दोनों को अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए समय दिया।
जमीन के बदले नौकरी ‘घोटाला’ प्रसाद के रेल मंत्री के तौर पर कार्यकाल (2004 से 2009) के दौरान मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम-मध्य जोन में की गई ग्रुप-डी नियुक्तियों से संबंधित है। अधिकारियों के मुताबिक, ये नियुक्तियां आवेदकों द्वारा राजद सुप्रीमो के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों को उपहार में दी गई या हस्तांतरित की गई जमीनों के बदले की गई थीं।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप