जमीन के बदले नौकरी घोटाला : उच्च न्यायालय ने सरकारी गवाहों से जुड़े मुद्दे पर सीबीआई से जवाब मांगा
जमीन के बदले नौकरी घोटाला : उच्च न्यायालय ने सरकारी गवाहों से जुड़े मुद्दे पर सीबीआई से जवाब मांगा
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के सहयोगी द्वारा दायर उस याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि जमीन के बदले नौकरी ‘घोटाले’ के मामले में सरकारी गवाह बने पांच व्यक्तियों को मुकदमे से राहत देते समय उपयुक्त प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने लालू प्रसाद के पूर्व विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) भोला यादव द्वारा दायर याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया और एजेंसी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
उच्च न्यायालय को शुक्रवार को सूचित किया गया कि अधीनस्थ अदालत ने आरोप तय करने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय ने संबंधित पक्षों से आदेश की प्रति रिकॉर्ड पर रखने को कहा और याचिका की अगली सुनवाई 27 जनवरी के लिए सूचीबद्ध की।
अधीनस्थ अदालत ने आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए मामले की सुनवाई 29 जनवरी के वास्ते निर्धारित की है।
भोला यादव, राजद के राष्ट्रीय महासचिव हैं और लालू परिवार के साथ जमीन के बदले नौकरी ‘घोटाले’ में सह-आरोपी हैं।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान, भोला के वकील ने दलील दी कि निचली अदालत ने सरकारी गवाह बने पांच व्यक्तियों को मुकदमे से सुरक्षा दे दी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उनके बयान दर्ज किए।
भोला का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल और मनिंदर सिंह ने कहा कि प्रक्रिया के अनुसार, पहले आरोपी को मुकदमे से सुरक्षा दिया जाता है और फिर ‘सीआरपीसी’ की धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, निचली अदालत ने इस मामले में प्रक्रिया को उलट दिया और पहले बयान दर्ज किया और फिर मुकदमे से सुरक्षा दी।
सिब्बल ने यह भी कहा कि इस मामले में भोला के खिलाफ एकमात्र सबूत सरकारी गवाह बने व्यक्तियों के बयान हैं।
हालांकि, सीबीआई के वकील ने कहा कि पांचों व्यक्तियों को प्रक्रिया के अनुसार ही अभियोजन से सुरक्षा दी गयी थी।
सीबीआई ने कथित घोटाले के संबंध में लालू प्रसाद, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए हैं।
आरोप है कि भारतीय रेलवे के मध्यप्रदेश में जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं और भर्ती किये जाने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन तोहफ़े में दी या हस्तांतरित की।
भाषा
सुभाष अविनाश
अविनाश

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